मस्टररोल में 15 नाम संदिग्ध! मेट की भूमिका पर सवाल बरोड़ा पंचायत के बारा गांव का मामला: फोटो के बाद श्रमिकों के चले जाने का आरोप, मेट ने 4-5 नामों को लेकर कही अहम बात

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सलूंबर। ग्राम पंचायत बरोड़ा के बारा गांव में मनरेगा कार्य के मस्टररोल में दर्ज हाजिरी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। करीब 15 श्रमिकों की उपस्थिति पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने मस्टररोल में दर्ज हाजिरी का मौके पर मौजूद श्रमिकों से भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। आरोप है कि कुछ श्रमिक कार्यस्थल पर फोटो खिंचवाने के बाद चले जाते हैं, जबकि उनकी हाजिरी मस्टररोल में दर्ज रहती है। हालांकि, आरोपों की वास्तविकता विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
मामले में सबसे अहम सवाल मस्टररोल भरने और उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे हैं। जब मेट से पूछा गया कि मस्टररोल कौन भरता है, तो मेट ने स्वयं मस्टररोल भरने की बात कही। इसके बावजूद पूरी जिम्मेदारी एलडीसी पर डालने को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।
कॉल वार्ता में मेट ने 4-5 नामों को लेकर खुद के लिए स्वीकारोक्ति किए जाने की बात सामने आई है। वहीं, मौके पर मस्टररोल में उपस्थिति दर्ज करने की जिम्मेदारी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है। ऐसे में मेट और एलडीसी की भूमिका की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

15 नामों पर सवाल, मेट ने नाम बताने से किया इनकार

मस्टररोल में दर्ज बताए जा रहे संदिग्ध नामों को लेकर जब मेट से जानकारी मांगी गई तो नाम बताने से इनकार कर दिया गया। इससे मस्टररोल में दर्ज हाजिरी और कार्यस्थल पर वास्तविक रूप से मौजूद श्रमिकों की संख्या के बीच अंतर को लेकर संदेह और गहरा गया।

वहीं, संबंधित एलडीसी से मामले की जानकारी लेने पर उन्होंने प्रकरण से अनभिज्ञता जताते हुए पूरे मामले से बीडीओ को अवगत कराने की बात कही।

फोटो खिंचवाकर चले जाने का आरोप

एक नरेगा श्रमिक का आरोप है कि करीब 15 लोग कार्यस्थल पर आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और इसके बाद चले जाते हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं और ऐसे श्रमिकों की हाजिरी मस्टररोल में दर्ज होना सामने आता है तो यह मनरेगा कार्य में गंभीर अनियमितता का मामला हो सकता है।

मस्टररोल से मौके तक हो सत्यापन

अब पूरे मामले में मस्टररोल में दर्ज श्रमिकों की सूची, ऑनलाइन उपस्थिति, कार्यस्थल की फोटो और मौके पर श्रमिकों की वास्तविक मौजूदगी का मिलान जांच का अहम बिंदु रहेगा। प्रत्येक नाम का भौतिक सत्यापन होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मेट द्वारा मस्टररोल भरने की बात स्वीकार किए जाने, कुछ नामों को लेकर सामने आई कथित स्वीकारोक्ति और एलडीसी की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के बीच अब विभागीय जांच पर निगाहें टिकी हैं। जांच में अनियमितता या फर्जी हाजिरी की पुष्टि होने पर जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।फिलहाल मामला आरोपों और दावों तक सीमित है। आरोपों की पुष्टि संबंधित विभाग की निष्पक्ष जांच के बाद ही होगी।

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