सलूम्बर। विशेष न्यायाधीश, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) न्यायालय, सलूम्बर न्याधिश श्री रामेश्वर प्रसाद चौधरी ने नाबालिग भतीजी से दुष्कर्म के मामले में आरोपी बक्शीलाल को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी पर जुर्माना भी लगाया तथा पीड़िता को 3 लाख रुपए की प्रतिकर राशि प्रदान करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को अनुशंसा की है।
अभियोजन के अनुसार 6 जून 2025 को आरोपी ने अपने घर आई नाबालिग भतीजी को अकेला पाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता गर्भवती हो गई। बाद में उसने परिजनों को पूरी घटना बताई, जिस पर झल्लारा थाना में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने अनुसंधान पूरा कर न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया।
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पीड़िता, उसके माता-पिता, चिकित्सकों सहित 11 गवाहों के बयान एवं 29 दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। एफएसएल की डीएनए रिपोर्ट में आरोपी का डीएनए पीड़िता के जैविक नमूनों से मेल खाने की पुष्टि हुई, जिसे न्यायालय ने महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य माना।
विशेष न्यायाधीश श्री रामेश्वर प्रसाद चौधरी ने अपने निर्णय में कहा कि चाचा-भतीजी का रिश्ता विश्वास, मर्यादा और संरक्षण का प्रतीक होता है, लेकिन आरोपी ने इस पवित्र रिश्ते को कलंकित कर गंभीर अपराध किया है। मौखिक एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 127(2), 75(2) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 3/4 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
मामले में राज्य सरकार की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक रणजीत पुर्बिया ने प्रभावी पैरवी की, जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपी के विरुद्ध यह कठोर निर्णय पारित किया।