संसदीय संकुल परियोजना से जनजातीय अंचल को नई दिशा, 1600 सीताफल पौधों से हरियाली और आजीविका का संकल्प

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सलूम्बर, 11 जुलाई सराड़ा उपखंड की नाल हल्कार ग्राम पंचायत शनिवार को हरियाली और विकास के संदेश की साक्षी बनी, जहां संसदीय संकुल परियोजना के तहत महावृक्षारोपण अभियान आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके, राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया, जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी, सांसद मन्नालाल रावत, विधायक शांता देवी मीणा सहित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम के दौरान करीब 1600 सीताफल के पौधे रोपित किए गए। वक्ताओं ने इसे केवल पर्यावरण संरक्षण का अभियान नहीं, बल्कि जनजातीय परिवारों की आय बढ़ाने और पलायन रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण ही भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है। फलदार पौधों के माध्यम से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा और पहाड़ी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ने से जल संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
सांसद मन्नालाल रावत ने कहा कि संसदीय संकुल विकास परियोजना का उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में बागवानी को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाई जाएगी। साथ ही गांवों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया ने कहा कि जनजातीय अंचल के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार समन्वय के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे।
टीएडी मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने कहा कि सड़क, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार सरकार की प्राथमिकता है। जल जीवन मिशन सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों का विकास तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने वृक्षारोपण को जलवायु परिवर्तन से मुकाबले का प्रभावी माध्यम बताया।
इस अवसर पर ग्राम पंचायत की प्रशासक (सरपंच) वर्षा देवी ने क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं और विकास संबंधी मांगों को मंच पर रखा। उन्होंने तालाबों के पुनर्जीवन, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, सड़कों के निर्माण, एनीकटों की मरम्मत, स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, मोबाइल नेटवर्क सुधार तथा कृषि एवं पशुपालन आधारित रोजगार को बढ़ावा देने की मांग करते हुए जनजातीय क्षेत्र के समग्र विकास पर जोर दिया।
कार्यक्रम के समापन पर किसानों को मक्का बीज वितरित किए गए तथा आधुनिक खेती और फलदार पौधों के संरक्षण की जानकारी भी दी गई। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण तथा जनजातीय क्षेत्र के सतत विकास का सामूहिक संकल्प लेते हुए अधिकाधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संदेश दिया।

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