ढोल की थाप पर गूंजा सलूंबर, आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगा शहर विश्व आदिवासी दिवस पर निकली भव्य रैली, हजारों समाजबंधुओं ने दिखाया एकजुटता का संदेश; शिक्षा, सुरक्षा और संस्कार पर दिया जोर

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सलूम्बर। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को सलूम्बर नगर आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता के रंग में रंगा नजर आया। जिलेभर से बड़ी संख्या में समाजबंधु कार्यक्रम में पहुंचे। पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवक-युवतियां, महिलाएं और बच्चे ढोल-नगाड़ों की थाप तथा डीजे की धुन पर उत्साह के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान आदिवासी संस्कृति की झलक दिखाई दी।

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा और बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर फूल मालाएं अर्पित कर की गई। इसके बाद समाजबंधुओं ने आदिवासी समाज की संस्कृति, महापुरुषों के विचारों और सामाजिक उत्थान को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।

खेल मैदान में दिखी संस्कृति की झलक

सलूम्बर विद्यालय के खेल मैदान में आयोजित कार्यक्रम में समाज के युवाओं और बालिकाओं ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। नन्हे बच्चों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर अपनी संस्कृति से परिचय कराया। महिलाओं ने भी पारंपरिक वेशभूषा में ढोल की थाप पर नृत्य कर कार्यक्रम में उत्साह भर दिया।

कार्यक्रम में बच्चों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। समाज के लोगों ने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और महापुरुषों के इतिहास से जोड़ना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी पहचान और विरासत को मजबूती से आगे बढ़ा सकें।

वक्ताओं ने शिक्षा को बताया सबसे बड़ा हथियार

कार्यक्रम को संबोधित करने वाले वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखते हुए समाज के विकास के लिए शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। वक्ताओं ने अभिभावकों से कहा कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाएं और उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करें।
उन्होंने कहा कि समाज की तरक्की केवल आर्थिक मजबूती से नहीं, बल्कि शिक्षा और जागरूकता से संभव है। युवाओं से नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने तथा समाजहित में सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील भी की गई।

महिलाओं से बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने की अपील

कार्यक्रम में माता-बहनों से भी बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि बेटा हो या बेटी, सभी को समान अवसर देकर पढ़ाया जाए और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। शिक्षा ही बच्चों के भविष्य को बेहतर दिशा देने का सबसे मजबूत माध्यम है।

हेलमेट को लेकर भी दिया सुरक्षा संदेश

कार्यक्रम के दौरान सड़क सुरक्षा को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया। वक्ताओं ने वाहन चलाते समय हेलमेट का अनिवार्य रूप से उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी सावधानी जीवन को सुरक्षित रख सकती है, इसलिए दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट को बोझ नहीं बल्कि सुरक्षा कवच समझना चाहिए।

पुलिस-प्रशासन की मुस्तैदी से शांतिपूर्वक संपन्न हुआ आयोजन

बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से भी व्यापक व्यवस्थाएं की गईं। नगर के विभिन्न स्थानों पर पुलिसकर्मी तैनात रहे। यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई स्थानों पर बड़े वाहनों का प्रवेश रोका गया।
रैली के दौरान डीजे और ढोल-नगाड़ों से जुड़े वाहनों को भी एक ओर करवाकर यातायात व्यवस्था सुचारू रखी गई। पुलिस प्रशासन की निगरानी में रैली शांतिपूर्वक आगे बढ़ी और कार्यक्रम के बाद समाजबंधु व्यवस्थित रूप से अपने-अपने स्थानों के लिए रवाना हुए।

ढोल की थाप पर थिरके समाजबंधु

रैली में आदिवासी समाज की पारंपरिक वेशभूषा और संस्कृति ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच युवा, महिलाएं और बच्चे उत्साह के साथ आगे बढ़ते नजर आए। पूरे नगर में जगह-जगह लोगों की भीड़ दिखाई दी और विश्व आदिवासी दिवस का उत्साह देखते ही बन रहा था।
कार्यक्रम ने संस्कृति के संरक्षण, शिक्षा के प्रसार, सामाजिक जागरूकता और एकजुटता का संदेश दिया। हजारों समाजबंधुओं की भागीदारी से सलूम्बर में विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन उत्साह और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।

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