सलूंबर। पशुपालकों के लिए पशु की आकस्मिक मौत केवल पशुधन का नुकसान नहीं, बल्कि परिवार की आय पर भी सीधा असर डालती है। ऐसे में मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना पशुपालकों के लिए आर्थिक सहारे का जरिया बन रही है। योजना के तहत पात्र जनआधार धारक पशुपालकों के पशुओं का शून्य प्रीमियम पर निःशुल्क बीमा किया जा रहा है। पशु की आकस्मिक मृत्यु होने पर नियमानुसार बीमा क्लेम के जरिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
सलूंबर जिले में पशुपालन विभाग की ओर से योजना का लाभ अधिक से अधिक पशुपालकों तक पहुंचाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर लगाए जा रहे हैं। पशु चिकित्सा संस्थानों के साथ मैदानी कार्मिकों के माध्यम से भी पशुओं के बीमा के लिए पंजीकरण कराया जा रहा है।
पिछले साल 58.28 लाख के डेथ क्लेम
पशुपालन विभाग के जिला समन्वयक अधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि वर्ष 2024-25 में जिले में 16,704 पशुओं का बीमा किया गया। इससे 7,555 जनआधार लाभार्थी योजना से जुड़े। इस दौरान पशुओं की मृत्यु के मामलों में डेथ क्लेम के तहत लाभार्थियों को 58.28 लाख रुपए की बीमा राशि का भुगतान किया गया।
इस साल 30 हजार से अधिक बीमा का लक्ष्य
वर्ष 2025-26 के लिए सलूंबर जिले में 30,304 पशुओं के बीमा का लक्ष्य तय किया गया है। इसके मुकाबले अब तक 15,458 पशुओं का बीमा किया जा चुका है। करीब 5,920 जनआधार लाभार्थी योजना से लाभान्वित हुए हैं। इस अवधि में डेथ क्लेम के रूप में 26.90 लाख रुपए का भुगतान पशुपालकों को किया जा चुका है।
दो साल में 85.18 लाख रुपए का भुगतान
आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान अब तक डेथ क्लेम के रूप में पशुपालकों को कुल 85.18 लाख रुपए की बीमा राशि मिल चुकी है। विभाग का जोर अब शेष पात्र पशुपालकों और उनके पशुओं को भी योजना के दायरे में लाने पर है।
उपनिदेशक पशुपालन विभाग सलूंबर डॉ. रविन्द्र कुमार गोयल के निर्देशन में योजना के क्रियान्वयन और प्रचार-प्रसार का काम किया जा रहा है। विभाग ने पात्र पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने पशुओं का अधिकाधिक संख्या में निःशुल्क बीमा करवाएं और पंजीकरण शिविरों अथवा संबंधित पशु चिकित्सा संस्थानों में आवश्यक प्रक्रिया पूरी करें।






