
मनस्वी के नामकरण संस्कार को अनोखे तरीके से सेलिब्रेट किया। डांगी ने नामकरण संस्कार के आयोजन में फलदार पोंधें लगा कर व कार्यक्रम में आयें मेहमानों को तुलसी के पोंधें वितरित कर और अपना घर आश्रम में रह रहें। निराश्रित प्रभुजी को प्रसाद ग्रहण करवा कर किया। इसके साथ ही जोधपुर से आयें कथा वाचक डॉ इंद्रजीत छंगाणी द्वारा संगीतमय सुन्दर काण्ड का गायन किया गया। कार्यक्रम में पधारे शहर के जाने-माने आयुर्वेदाचार्य डॉ.शोभा लाल औदिच्य ने कहा कि डांगी परिवार की यह बहुत अच्छी पहल है। हमें अपने जीवन को
बचाना है तो पक्षियों व पर्यावरण को बचाना होगा यदि हम ऐसे छोटे-बड़े आयोजनों फलदार पोंधे लगाएं और उनका मेहमानों में वितरण कर वृक्षारोपण हेतु प्रेरित करे तो काफी हद तक हम पक्षी और पर्यावरण को बचाने व बढ़ाने में मददगार हो सकते हैं। कथा वाचक डॉ इंद्रजीत छंगाणी ने कहा कि यदि हमें राम जैसा राजा,भरत जैसा भाई,माता जानकी जैसी बहु और हनुमान जी जैसा सेवक चाहिए तो हमें अपनी पीढ़ी को आध्यात्म से जोड़ना होगा और हमारी पुरातन संस्कृति के प्रति युवा पीढ़ी को जागरूक करना होगा तभी हम रामराज ला पायेंगे। डांगी ने एक अनोखी पहल कर कथास्थल की सजावट में पशु पक्षी व पर्यावरण को बचाने का संदेश “प्रकृति है तो जीवन है इस का बचाव ही
असली मानवता है”, “गोमाता की सेवा से बढ़कर कोई तप नहीं कोई धर्म नहीं कोई यज्ञ नहीं” जैसे स्लोगन अंकित कराएं साथ ही कार्यक्रम स्थल की सजावट में अयोध्या श्री राम की झांकी के साथ-साथ हिरण,बन्दर शेर, गाय बतख जेसे कई प्रकार के पशु पक्षी व पोधो से सजाया गया। कार्यक्रम में पतंजलि योगपीठ उदयपुर के पदाधिकारी व योग प्रेमी भाई-बहन, उदयपुर अपना घर आश्रम के पदाधिकारी व सेवा साथी,पर्यावरण प्रेमी व कई समाजसेवी उपस्थित थे।WhatsApp us