झल्लारा/सलूंबर। मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, झल्लारा के तत्वावधान में आयोजित उच्च माध्यमिक विद्यालयों के संस्था प्रधानों की दो दिवसीय ‘सत्रारंभ वाकपीठ’ का भव्य शुभारंभ बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को हुआ। बांसवाड़ा रोड स्थित कलुतडा की वृंदावन होटल में आयोजित इस संगोष्ठी के प्रथम दिन शैक्षिक गुणवत्ता, नवाचार और विभिन्न विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नगेन्द्र कुमार मेहता के मुख्य आतिथ्य एवं वाक्पीठ अध्यक्ष यशवंत कुमार मेहता की अध्यक्षता में हुआ। उद्घाटन सत्र के दौरान सीबीईओ मेहता ने अपने उद्बोधन में शिक्षा के बदलते स्वरूप और शिक्षकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। वाक्पीठ अध्यक्ष यशवंत कुमार मेहता ने सभी आगंतुकों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए संगोष्ठी के उद्देश्यों को रेखांकित किया। इस गरिमामय अवसर पर हिमांशु भट्ट, रामसिंह सिसोदिया, मनोहरलाल जैन, लक्ष्मण मीणा, दिनेश मीणा एवं पूंजीलाल मीणा जैसे गणमान्य शिक्षाविद् और संगठन पदाधिकारी उपस्थित रहे।
संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। वार्ता के क्रम में उमंग कुमार पंड्या ने विद्यालयों में संचालित सरकारी योजनाओं और उनके धरातल पर सटीक क्रियान्वयन की बारीकियों से अवगत कराया। इसके साथ ही डॉ. गोविंदसिंह शक्तावत ने “नये भारत में कौशल आधारित शिक्षा” विषय पर प्रभावी व्याख्यान देते हुए इसे वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। शैक्षिक सत्रों के दौरान भगवती लाल शर्मा ने विद्यालयों में नामांकन वृद्धि और उपलब्ध भौतिक संसाधनों के समुचित उपयोग की रणनीतियां साझा कीं, जबकि नेहा जैन ने नैतिक शिक्षा व जीवन मूल्यों की आवश्यकता पर अपना पत्र वाचन प्रस्तुत किया। विद्यालयी जीवन में योग एवं स्वास्थ्य शिक्षा की अनिवार्यता को लेकर पूंजीलाल मीणा ने महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।
दोपहर के सत्र में संगोष्ठी को अधिक सहभागी बनाने के लिए सभी प्रतिभागियों को अलग-अलग समूहों में विभाजित किया गया। इन समूहों के बीच लाभकारी योजनाओं के संचालन, नामांकन वृद्धि के प्रयासों तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में प्रार्थना सभा की भूमिका जैसे विषयों पर गहन मंथन हुआ। ब्लॉक के विभिन्न विद्यालयों से आए संस्था प्रधानों ने अपने-अपने विद्यालयों के सफल प्रयोगों और जमीनी अनुभवों को साझा किया, जिससे कई उपयोगी और व्यावहारिक सुझाव निकलकर सामने आए। शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार और नवाचारों को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ प्रथम दिवस के सत्रों का समापन हुआ। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।