खोलड़ी विद्यालय में SDRF सलूंबर ने दिया आपदा प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण, विद्यार्थियों को सिखाए जीवन रक्षक उपाय

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झल्लारा। स्थानीय महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, खोलड़ी में राजस्थान आपदा प्रबंधन कार्यक्रम के अंतर्गत एक विशेष आपदा जागरूकता एवं प्रशिक्षण शिविर का सफल आयोजन किया गया। SDRF (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) सलूंबर की टीम द्वारा आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, अभिभावकों और विद्यालय स्टाफ को विभिन्न प्रकार की आपदाओं के प्रति जागरूक करना और उन्हें संकट के समय जीवन रक्षक उपायों से अवगत कराना था।
बरसात के आगामी मौसम को ध्यान में रखते हुए SDRF की टीम ने मुख्य रूप से जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियों से निपटने के व्यावहारिक तौर-तरीके सिखाए। टीम के विशेषज्ञों ने नदी-नालों में डूबने की स्थिति में किसी व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने, उसे प्राथमिक उपचार देने और पानी में लाइफ जैकेट का सही तरीके से उपयोग करने का जीवंत प्रदर्शन किया। इसके साथ ही, बाढ़ के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षात्मक उपायों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।
शिविर में केवल प्राकृतिक आपदाएं ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में अचानक सामने आने वाले संकटों पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। विशेषज्ञों द्वारा सड़क दुर्घटना होने पर घायल व्यक्ति को दी जाने वाली तुरंत सहायता, सर्पदंश (सांप के काटने) की पहचान व उसका सही उपचार, और अचानक हार्ट अटैक आने की स्थिति में CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देने की सही व वैज्ञानिक विधि का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा, आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए अग्निशमन यंत्र (फायर एक्स्टिंग्विशर) को सुरक्षित तरीके से चलाने का अभ्यास भी कराया गया।
प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए SDRF के अधिकारियों ने कहा कि किसी भी आपदा के समय घबराने के बजाय सही जानकारी, सतर्कता और त्वरित निर्णय लेने से जान-माल के नुकसान को बेहद कम किया जा सकता है। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने इस पूरे सत्र में भारी उत्साह दिखाया और आपदा प्रबंधन की तकनीकों को बारीकी से समझा। कई विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से सवाल पूछकर अपनी शंकाओं का समाधान भी किया।
कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. गोविन्द सिंह शक्तावत और समस्त स्टाफ ने SDRF सलूंबर टीम का गर्मजोशी से स्वागत और अभिनंदन किया। प्रधानाचार्य ने टीम द्वारा दिए गए इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और समयानुकूल बताते हुए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के व्यावहारिक ज्ञान से न केवल विद्यार्थी आत्मनिर्भर बनते हैं, बल्कि वे समाज में भी जागरूकता फैलाने का माध्यम बनते हैं। विद्यालय प्रशासन ने भविष्य में भी इस तरह के जनजागरूकता और जीवन रक्षक कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

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