आत्महत्या या ऑनर किलिंग? बढ़ती संदिग्ध मौतों पर प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग

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सलूम्बर में बढ़ती अस्वाभाविक मौतों पर उठी आवाज ऑनर किलिंग की आशंका के बीच त्वरित जांच और विशेष समिति गठन की मांग सलूम्बर। क्षेत्र में लगातार बढ़ रही अस्वाभाविक मौतों की घटनाओं को लेकर नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। अतिरिक्त जिला कलेक्टर, सलूम्बर को ज्ञापन सौंपकर किशोरियों, महिलाओं और युवाओं की संदिग्ध आत्महत्या एवं संभावित ऑनर किलिंग मामलों की निष्पक्ष व त्वरित जांच की मांग की गई है।
ज्ञापन में बताया गया कि गत वर्ष से क्षेत्र में अस्वाभाविक मृत्यु के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। हाल ही में 28 जनवरी 2026 को सलकावतो का गुड़ा में दो युवाओं द्वारा जीवन समाप्त करने की घटना सामने आई। वहीं 5 फरवरी 2026 को ग्राम दौलपुरा (पंचायत घटेड) में एक महिला की संदिग्ध मृत्यु का मामला सामने आया। इसके अलावा 3 फरवरी 2026 को जयसमन्द वन्यजीव अभयारण्य में जशोदा नामक युवती का शव पेड़ पर लटका मिला।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रतिवर्ष क्षेत्र में 8 से 14 तक ऐसी घटनाएं घटित हो रही हैं, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि ये वास्तविक आत्महत्याएं हैं या इज्जत के नाम पर की गई हत्याएं।
प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें
ज्ञापन में प्रशासन से निम्नलिखित कदम तत्काल उठाने की मांग की गई है—
अस्वाभाविक मृत्यु की सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे।
पोस्टमार्टम एवं फोरेंसिक जांच के बिना शव का अंतिम संस्कार न किया जाए।
यदि परिजन पुलिस रिपोर्ट के बिना अंतिम संस्कार कर देते हैं तो उनके विरुद्ध जांच प्रारंभ की जाए।
प्रत्येक मामले की जानकारी 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट कार्यालय को भेजी जाए।
यदि उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के कोई निर्देश हैं तो उनकी पालना सुनिश्चित की जाए।
ऐसी घटनाओं की रोकथाम व सामाजिक समझ विकसित करने हेतु एक विशेष समिति गठित की जाए, जिसमें सामाजिक संगठनों, महिला सुरक्षा से जुड़ी संस्थाओं एवं प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।
निष्पक्ष जांच की मांग
संगठनों का कहना है कि पारदर्शी और निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आ सकेगी तथा यदि किसी प्रकार की ऑनर किलिंग या दबाव की स्थिति सामने आती है तो दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्रवाई करने की अपील की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

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