सलूम्बर। जिले में जमीन सौदे से जुड़ा एक गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। न्यायालय की स्पष्ट रोक (स्टे) के बावजूद भूमि की प्लानिंग कर आवासीय व
वाणिज्यिक प्लॉट बेचने के आरोप लगे हैं। मामला मौजा दुदर, पटवार हल्का धारोद, तहसील सलूम्बर की आराजी नंबर 1190, 1191 व 1192 (कुल रकबा 0.5800 हेक्टेयर) से जुड़ा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त भूमि का 29 अगस्त 2023 को 1 करोड़ 25 लाख रुपये में विक्रय इकरार किया गया। सौदे के तहत 27 लाख 25 हजार रुपये चेक व ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि शेष राशि लेने के बावजूद विक्रय पत्र (रजिस्ट्री) नहीं किया गया।
न्यायालय में मामला,
स्टे आज भी प्रभावी
पीड़ित पक्ष द्वारा 20 मई 2025 को अतिरिक्त जिला न्यायालय, सलूम्बर में संविदा पालन का दिवानी वाद दायर किया गया, जिसका मुकदमा संख्या 04/25 है। न्यायालय ने 23 मई 2025 को उक्त भूमि के हस्तांतरण और निर्माण पर अस्थायी निषेधाज्ञा (स्टे) जारी की, जो वर्तमान में भी प्रभावी बताई जा रही है।
स्टे के दौरान पंजीयन के आरोप
आरोप है कि न्यायालय की रोक और संबंधित विभागों को सूचना दिए जाने के बावजूद नगर परिषद से प्रोविजनल भू-आवंटन पत्र प्राप्त कर 8 अगस्त 2025 को सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीयन करवा दिए गए। इसे लेकर नगर परिषद और सब-रजिस्ट्रार को पक्षकार बनाने तथा अवमानना का प्रार्थना पत्र 3 जुलाई 2025 को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। इस मामले की जवाब पेशी 9 अक्टूबर 2025 को निर्धारित है।
13 लोगों को बेचे गए प्लॉट, निरस्तीकरण का खतरा
स्टे के दौरान 13 व्यक्तियों को आवासीय व वाणिज्यिक प्लॉट बेचे जाने का विवरण सामने आया है। कानूनी विवाद के चलते इन सभी प्लॉटों पर निरस्तीकरण का खतरा मंडरा रहा है। यदि न्यायालय का निर्णय स्टे के पक्ष में रहता है तो खरीदारों को कानूनी व आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
आमजन को चेतावनी
पीड़ित पक्ष ने आम नागरिकों को चेतावनी दी है कि संबंधित आराजियों में किसी भी प्रकार का सौदा, खरीद या निर्माण न करें। अन्यथा भविष्य में न तो निर्माण अनुमति मिलेगी और न ही नगर परिषद लीज डीड पंजीयन कर सकेगी।
बड़ा सवाल
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जब न्यायालय का स्टे प्रभावी था तो संबंधित विभागों में पंजीयन कैसे हुआ? अब सभी की नजरें 18 फरवरी 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस पूरे मामले की कानूनी दिशा स्पष्ट होगी।
फिलहाल यह मामला प्रशासनिक कार्यप्रणाली और कानूनी प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर रहा है।









