सलूंबर। शहर में स्वच्छता को लेकर एक नई चेतना देखने को मिल रही है।“क्लीन सलूंबर-ग्रीन सलूंबर” अभियान के तहत स्थानीय नागरिकों ने श्रमदान कर यह साबित कर दिया कि बदलाव के लिए केवल संसाधन नहीं, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति जरूरी होती है। बिना किसी सरकारी सहयोग के शुरू हुई इस पहल ने शहर में सकारात्मक संदेश फैलाया है।
अभियान के अंतर्गत कनग्स माता क्षेत्र के समीप स्थित पटेल समाज और पूर्बिया समाज के श्मशान घाटों के साथ सर्वसर घाट पर व्यापक सफाई कार्य किया गया। वर्षों से जमी गंदगी, प्लास्टिक कचरा और झाड़ियों को हटाकर घाटों को व्यवस्थित रूप दिया गया। अब ये स्थान स्वच्छ और सुसज्जित नजर आ रहे हैं, जहां पहले अव्यवस्था का आलम था।
इस जनआंदोलन की शुरुआत सेरिंग तालाब के घाटों से हुई थी। इसके बाद पुरोहितवाड़ी स्थित बालिका विद्यालय परिसर में सफाई अभियान चलाया गया और अब यह पहल सरणी नदी घाट तक पहुंच चुकी है। यहां नदी किनारे के क्षेत्रों को भी साफ कर स्वच्छ वातावरण तैयार किया गया।
अभियान की विशेषता यह रही कि इसमें हर वर्ग के लोगों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। युवा, बुजुर्ग और समाजसेवी बिना किसी निर्देश के स्वयं आगे आए और जिम्मेदारी संभाली। सामूहिक श्रमदान से सरवर घाट की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।
शहरवासियों का मानना है कि यदि इसी प्रकार जनसहभागिता बनी रही और प्रशासन भी सक्रिय सहयोग दे, तो सलूंबर स्वच्छता के क्षेत्र में एक आदर्श शहर बन सकता है। लोगों ने यह भी कहा कि स्वच्छता केवल प्रशासन का नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है।
अभियान से जुड़े विष्णु सोनी और प्रहलाद पटेल ने बताया कि इस पहल ने शहर में नई सोच पैदा की है। सरणी नदी और घाटों की सफाई से न केवल गंदगी दूर हुई है, बल्कि लोगों में जागरूकता भी बढ़ी है। अब कई नागरिक अपने आसपास सफाई बनाए रखने और इस मुहिम से जुड़ने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
इस अभियान में पूर्व शिक्षा विभाग के उपनिदेशक महेश चंद्र आमेटा, विमल भट्ट, प्रहलाद पटेल, शिवानंद पुरोहित, तसदुक भाई बोहरा, विष्णु सोनी, राकेश प्रजापत, रामचंद सालवी सहित कई गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। सभी ने हर शनिवार को नियमित रूप से श्रमदान जारी रखने का संकल्प भी लिया।