सलूम्बर, 24 जुलाई। राजस्थान सरकार के फॉलो-अप ग्रामीण सेवा शिविर अब केवल सरकारी औपचारिकता नहीं बल्कि ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम बनते जा रहे हैं। शुक्रवार को झल्लारा पंचायत समिति की मोरीला और भबराना ग्राम पंचायतों में आयोजित शिविरों में राजस्व विभाग ने लंबे समय से लंबित मामलों का मौके पर ही निस्तारण कर लोगों को राहत पहुंचाई।
मोरीला ग्राम पंचायत के राजपुरा निवासी 80 वर्षीय खेमा मीणा करीब चार दशक से राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नाम की त्रुटि से परेशान थे। जमाबंदी में उनका नाम गलत दर्ज होने के कारण उन्हें भूमि संबंधी कार्यों और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में बार-बार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। शिविर में प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच के बाद अधिकारियों ने उसी दिन नियमानुसार कार्रवाई करते हुए अभिलेखों में सही नाम दर्ज कर दिया। वर्षों बाद समस्या का समाधान होने पर बुजुर्ग सहित उनके परिवार ने जिला प्रशासन और राजस्व विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।
वहीं भबराना ग्राम पंचायत में भी लंबे समय से लंबित पारिवारिक कृषि भूमि के बंटवारे का मामला आपसी सहमति से सुलझा लिया गया। संबंधित पक्षों की सहमति और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर राजस्व विभाग ने भूमि का विधिवत विभाजन कर रिकॉर्ड अद्यतन करने की प्रक्रिया पूरी की। इससे वर्षों से चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया और सभी पक्षों को उनके हिस्से की भूमि का अधिकार मिल गया।
प्रशासन का कहना है कि ग्रामीण सेवा शिविरों का उद्देश्य आमजन की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और संवेदनशील समाधान उपलब्ध कराना है। एक ही स्थान पर विभिन्न विभागों की सेवाएं उपलब्ध होने से ग्रामीणों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं और शासन की योजनाओं का लाभ समय पर मिल रहा है।