सलूम्बर। जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और आमजन की जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) उदयपुर के MBA विद्यार्थियों ने सलूम्बर जिले के चयनित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और आसपास के गांवों का दौरा कर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जमीनी स्तर पर अध्ययन किया। यह गतिविधि EQUIP-HWCs परियोजना के सहयोग से आयोजित की गई।
यह अध्ययन IIM उदयपुर के डिजाइन थिंकिंग पाठ्यक्रम का हिस्सा है, जिसके तहत विद्यार्थियों को वास्तविक परिस्थितियों में मौजूद समस्याओं को समझकर उनके व्यवहारिक और नवाचार आधारित समाधान विकसित करने का अवसर दिया जा रहा है। फील्ड विजिट के दौरान विद्यार्थियों ने स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया और ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तृत आकलन किया।
भ्रमण के दौरान छात्रों ने सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO), एएनएम, आशा सहयोगिनियों तथा ग्रामीणों से संवाद कर स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन, सामने आने वाली चुनौतियों और सुधार की संभावनाओं पर जानकारी जुटाई। इन अनुभवों के आधार पर अब विद्यार्थी ऐसे नवाचार मॉडल तैयार करेंगे, जिन्हें भविष्य में EQUIP-HWCs परियोजना और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से लागू करने का प्रयास किया जाएगा।
IIM उदयपुर की प्रोफेसर वेधा ने बताया कि यह पहल विद्यार्थियों को कक्षा से बाहर निकालकर वास्तविक सामाजिक समस्याओं से जोड़ती है। उनके अनुसार, जिला स्वास्थ्य प्रणाली को समझते हुए समाधान तैयार करने की यह प्रक्रिया देश में अपनी तरह का एक अभिनव प्रयोग है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. महेंद्र परमार ने इस पहल को स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों और स्वास्थ्य विभाग के बीच इस प्रकार का सहयोग भविष्य में भी जारी रखा जाएगा, ताकि नवाचारों के माध्यम से आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
विद्यार्थियों के अध्ययन भ्रमण के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के चयन और समन्वय में जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र पुरी गोस्वामी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।