युवाओं के हित का हवाला देकर धर्मेंद्र प्रधान ने सौंपा इस्तीफा, बोले— राष्ट्रसेवा का संकल्प रहेगा अडिग जंतर-मंतर के घटनाक्रम पर जताई चिंता, छात्रों का भविष्य और देश की एकता को बताया सर्वोपरि
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए कहा है कि पिछले कुछ दिनों की परिस्थितियों ने उन्हें गहरी पीड़ा पहुंचाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी व्यक्तिगत सम्मान या पद की प्रतिष्ठा से जुड़ा नहीं, बल्कि देश के युवाओं के हित और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की भावना से प्रेरित है।
अपने संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और उनके सपने तथा भविष्य किसी भी प्रकार की राजनीतिक या कानूनी उलझनों में नहीं फंसने चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का ध्यान आंदोलन और विवादों के बजाय शिक्षा तथा अपने करियर पर केंद्रित रहना चाहिए।
उन्होंने जंतर-मंतर सहित देशभर में बने हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रविरोधी ताकतों को ऐसी परिस्थितियों का लाभ उठाने का अवसर नहीं मिलना चाहिए। देश की एकता और अखंडता सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी सोच के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र भेजने का निर्णय लिया।
धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व, विश्वास और मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में राष्ट्रसेवा उनके जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य है और आगे भी वे उसी समर्पण के साथ देशहित में कार्य करते रहेंगे।
अपने संदेश के अंत में उन्होंने प्रभु श्रीजगन्नाथ के आशीर्वाद का स्मरण करते हुए कहा कि भविष्य में भी वे भारत माता, ओडिशा की जनता और देश के युवाओं की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए हरसंभव योगदान देते रहेंगे।