60 लाख के बिल पर उठा विवाद, जांच में मिली सड़क निर्माण की पुष्टि पहले नोटिस, फिर बदले हालात; हाई लेवल जांच और पंचायत रिपोर्ट से विभागीय कार्रवाई पर उठे सवाल

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सलूंबर, 28 जुलाई। 7प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-IV) के तहत कंतोड़ा-गनचौपड़ सड़क निर्माण के प्रथम बिल को लेकर सार्वजनिक निर्माण विभाग में शुरू हुआ विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। शुरुआती स्तर पर बिना कार्य कराए भुगतान प्रक्रिया शुरू करने का आरोप लगाते हुए तीन इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन बाद में हुई उच्च स्तरीय जांच में मौके पर सड़क निर्माण कार्य पाए जाने से पूरे मामले की दिशा बदल गई है।
जानकारी के अनुसार वीरपुरा ग्राम पंचायत क्षेत्र में प्रस्तावित सड़क निर्माण के प्रथम रनिंग बिल को लेकर विभागीय स्तर पर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। आरोप था कि लगभग 60.74 लाख रुपये का बिल पर्याप्त निर्माण कार्य के बिना तैयार किया गया। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया।
नोटिस के जवाब में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सड़क पर अर्थवर्क, पाइप कलवर्ट और रिटेनिंग वॉल सहित स्वीकृत कार्य नियमानुसार किए गए थे तथा माप पुस्तिका के आधार पर ही भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इसके बाद अतिरिक्त मुख्य अभियंता ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की समिति गठित की।
समिति ने स्थल निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंप दी। सूत्रों के अनुसार निरीक्षण के दौरान सड़क पर निर्माण कार्य मौजूद पाया गया। वहीं ग्राम पंचायत वीरपुरा और पंचायत समिति जयसमंद की रिपोर्ट में भी उल्लेख किया गया कि पिछले पांच वर्षों में इस मार्ग पर किसी अन्य एजेंसी द्वारा कोई निर्माण नहीं कराया गया था। इससे वर्तमान निर्माण कार्य हालिया होने के संकेत मिलते हैं।
जांच के बाद अब विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ गई है। चर्चाएं इस बात को लेकर हैं कि तकनीकी जांच पूरी होने से पहले नोटिस जारी करने की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई। यदि स्थल पर निर्माण कार्य मिला है तो शुरुआती आरोपों का आधार क्या था, इस पर भी विभाग के भीतर मंथन शुरू हो गया है।
अधीक्षण अभियंता (गुण नियंत्रण) मुनीम चंद्र मीणा ने बताया कि जांच रिपोर्ट अतिरिक्त मुख्य अभियंता को सौंप दी गई है। अंतिम निर्णय रिपोर्ट के परीक्षण और विभागीय स्तर पर विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा। फिलहाल पूरे मामले पर विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की नजर बनी हुई है।

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