सलूंबर में गूंजा गौ-सम्मान का स्वर, हजारों श्रद्धालुओं ने निकाली जनरैली; राष्ट्रीय गौ-संरक्षण नीति की उठी मांग

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

सलूंबर। गौवंश संरक्षण और गौ-सम्मान को लेकर सोमवार को सलूंबर नगर में जनभावनाओं का अभूतपूर्व प्रदर्शन देखने को मिला। ‘गो-सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत आयोजित विशाल जनरैली में संत समाज, मातृशक्ति, युवाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों सहित बड़ी संख्या में गौभक्त शामिल हुए। नगर के प्रमुख मार्गों पर निकली रैली के दौरान “जय गौ माता” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो गया।
प्रताप चौराहा स्थित संघ कार्यालय से प्रारंभ हुई रैली सिद्धी धाम मंदिर, प्रताप चौक, पुलिस थाना और हाड़ीरानी कॉलेज सहित नगर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंची। रैली का आकर्षण यह रहा कि एक गौमाता भी पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं के साथ चली, जिसका नागरिकों ने पुष्पवर्षा और श्रद्धाभाव से स्वागत किया।
रैली के समापन पर प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा। ज्ञापन में देशभर में गौवंश संरक्षण के लिए एक प्रभावी एवं सशक्त राष्ट्रीय नीति लागू करने की मांग करते हुए कहा गया कि गौ-संरक्षण को मजबूत कानूनी संरक्षण मिलना समय की आवश्यकता है।
ज्ञापन में देशी गौवंश को ‘राष्ट्रमाता’ अथवा ‘राष्ट्र आराध्या’ का संवैधानिक दर्जा देने, गौ-तस्करी और गौ-वध के विरुद्ध कठोर केंद्रीय कानून बनाने तथा ऐसे अपराधों को गैर-जमानती श्रेणी में शामिल कर कड़ी सजा का प्रावधान करने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई।
इसके अलावा पंचगव्य आधारित उत्पादों को सरकारी खरीद नीति से जोड़ने, विद्यालयों एवं मंदिरों में गौ-घृत के उपयोग को बढ़ावा देने, प्रत्येक ग्राम पंचायत में नंदीशाला तथा जिला स्तर पर आदर्श गौ-अभयारण्य स्थापित करने का सुझाव भी ज्ञापन में शामिल किया गया। राष्ट्रीय राजमार्गों पर घायल गौवंश के उपचार के लिए विशेष एम्बुलेंस सेवा और ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने, स्कूली पाठ्यक्रम में गौ-विज्ञान विषय शामिल करने तथा गोचर और ओरण भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर चारा सुरक्षा कानून लागू करने की मांग भी उठाई गई।
आयोजन में क्षेत्र के अनेक संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। विभिन्न संतों ने अपने उद्बोधन में गौ-संरक्षण को भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए समाज से इस दिशा में निरंतर जागरूक रहने का आह्वान किया।
आयोजकों का कहना था कि गौ-सम्मान केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि प्राकृतिक खेती, जैविक जीवनशैली और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की आधारशिला भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि जनसमर्थन के बल पर गौ-संरक्षण से जुड़े मुद्दों को केंद्र सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाएगा।

संवाददाता शंकर लाल भोई

और पढ़ें

error: Content is protected !!