





उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार और प्राथमिकता के आधार पर उनका शीघ्र निस्तारण किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन की जिम्मेदारी केवल परिवेदनाएं सुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी समाधान की नियमित मॉनिटरिंग भी जरूरी है।


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