गेहूं खरीद में देरी: किसान त्रस्त, दलाल मस्त; सरकारी उदासीनता से बिचौलियों की चांदी!

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सागवाड़ा/डूंगरपुर। वागड़ क्षेत्र में इस वर्ष गेहूं की फसल की कटाई होली से पहले ही शुरू हो गई थी, लेकिन सरकारी खरीद केंद्रों के न खुलने से किसान बिचौलियों के हाथों लुटने को मजबूर हैं। वागड़ वॉरियर्स के संयोजक नरेश पाटीदार (दिवड़ा) ने प्रशासन पर जमीनी हकीकत से आंखें मूंदने का आरोप लगाते हुए कहा कि जहां एक ओर 90% फसल कट चुकी है, वहीं दूसरी ओर सरकार की उदासीनता के कारण किसान अपनी उपज औने-पौने दामों में बेच रहा है।
​ग्राउंड रिपोर्ट: 90% कटाई पूरी, पर रजिस्ट्रेशन का अता-पता नहीं
​क्षेत्र में स्थिति यह है कि 15 मार्च तक लगभग 90% कृषकों के गेहूं की कटाई हो चुकी है और 70% किसानों के यहां थ्रेसिंग का काम भी निपट गया है। सरकारी दावों के विपरीत, भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने अब तक न तो रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू की है और न ही खरीद केंद्रों का स्थान तय किया है।
​MSP से 525 रुपये कम पर बिक रहा गेहूं
​किसानों की आर्थिक कमर टूट रही है। एक तरफ सोयाबीन की फसल में नुकसान झेल चुके किसानों को गेहूं से उम्मीद थी, लेकिन उत्पादन खर्च के मुकाबले पैदावार कम हुई है।
​सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): ₹2,725 प्रति क्विंटल बाजार में दलालों का भाव: ₹2,200 प्रति क्विंटल किसानों को सीधा नुकसान: ₹525 प्रति क्विंटल “अधिकारियों का कहना है कि 1 अप्रैल के बाद कटाई शुरू होगी, जबकि हकीकत में कटाई खत्म होने को है। प्रशासन की इस लेत-लतीफी का फायदा उठाकर दलाल किसानों का शोषण कर रहे हैं। नरेश पाटीदार, संयोजक, वागड़ वॉरियर्स FCI बनाम राजफेड: स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग
​क्षेत्र में चने और सरसों की खेती मात्र 7-10% है, जबकि मुख्य फसल गेहूं है। पूर्व में गेहूं की खरीद राजफेड और नेफेड द्वारा क्रय-विक्रय सहकारी केंद्रों के माध्यम से की जाती थी, जो सुचारू रहती थी। इस वर्ष जिम्मेदारी FCI को दी गई है, लेकिन धरातल पर कोई तैयारी नहीं दिख रही। स्थानीय विधायक शंकरलाल ने भी पूर्व में मांग रखी है कि खरीद प्रक्रिया पुराने ढर्रे (राजफेड/नेफेड) पर ही शुरू की जाए ताकि किसानों को राहत मिल सके। प्रशासन से मुख्य मांगें: FCI की बजाय पूर्व की भांति राजफेड/नेफेड के माध्यम से तुरंत खरीद शुरू हो। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से खोला जाए।
​जमीनी आंकड़ों के आधार पर केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि वागड़ का किसान आर्थिक रूप से समृद्ध हो सके।

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