सलूंबर। नगर परिषद चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद शहर की राजनीति में अब अगला मुकाबला सभापति की कुर्सी को लेकर शुरू हो गया है। 25 वार्डों वाली नगर परिषद में भाजपा ने 12 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में बढ़त बनाई, जबकि कांग्रेस के खाते में 11 वार्ड आए। ऐसे में बहुमत के लिए जरूरी संख्या पूरी करने में निर्दलीय और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के पार्षदों की भूमिका अहम हो गई है। चुनावी नतीजों में कई चर्चित चेहरों को हार का सामना करना पड़ा। पूर्व सभापति और पार्षद रहे प्रद्युम्न कोड़िया
चुनाव हार गए। वहीं नीलम पटेल
को भी इस बार मतदाताओं ने जीत नहीं दिलाई।
दूसरी ओर कैलाश गांधी
और मिनाक्षी
ने अपने-अपने वार्ड में जीत दर्ज कर राजनीतिक तस्वीर में अपनी मौजूदगी मजबूत की है।
वार्ड 14 में लॉटरी से खुला भाजपा का खाता
वार्ड 14 का मुकाबला बेहद रोचक रहा। यहां भाजपा प्रत्याशी और निर्दलीय प्रत्याशी के बीच मुकाबला बराबरी पर पहुंचने के बाद लॉटरी के जरिए फैसलाहुआ, जिसमें भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में परिणाम आया। इस तरह लॉटरी ने वार्ड 14 का चुनावी फैसला तय कर दिया और भाजपा की संख्या 12 तक पहुंच गई।
सभापति चुनाव में अब हर वोट की कीमत
भाजपा और कांग्रेस के बीच महज एक सीट का अंतर है। भाजपा 12 और कांग्रेस 11 पार्षदों के साथ आमने-सामने हैं। ऐसे में निर्दलीय
और BAP
के पार्षद अब निर्णायक स्थिति में नजर आ रहे हैं। सभापति चुनाव में दोनों प्रमुख दलों के लिए इन पार्षदों का समर्थन बेहद महत्वपूर्ण होगा।
अब शहर की सियासत में सबसे बड़ा सवाल यही है क्या भाजपा अपने 12 पार्षदों के दम पर सभापति की कुर्सी तक पहुंचेगी, या कांग्रेस निर्दलीय और BAP के सहारे बाजी पलटेगी?
सलूंबर में चुनाव परिणाम के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और आने वाले दिनों में तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।