ग्राम पंचायत सुरखण्ड खेड़ा मे ग्रामीणों का फूटा आक्रोश ग्रामीण उतरे सड़कों पर पंचायत का किया घेराव

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सलूंबर जिले के सेमारी के सुरखण्ड खेड़ा में ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा वर्षों से चली आ रही मूलभूत समस्याओं से ग्रामीणों ने,ग्राम पंचायत सुरखण्ड खेड़ा का घेराव कर,जोरदार नारेबाजी की और पंचायत प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा
*ग्राम पंचायत मे सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई* ग्रामवासियों ने बताया कि गांव में कई वर्षों से सफाई कार्य नहीं हो रहा है नालियां गंदगी से भर चुकी हैं मुख्य चौराहों जो ग्राम पंचायत से 10 मीटर की दूरी पर है जहा पर कचरे के ढेर लगे हुए हैं गांव में कचरा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है जिससे पूरे क्षेत्र में बदबू से बुरे हालात बने हुए और हरतफ मच्छर की तादात बढ़ती नजर आ रही है एक तरफ स्वच्छता को लेकर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं और आज एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे देखकर आपको भी पता चलता की वादे सभी कागजों में ही रह गए *कचरे के ढेरो में गाय और बैल पॉलीथीन खाते नजर आ रहे है* जहां पर आप देख सकते हैं कि कचरे के ढेरो में गाय और बैल पॉलिथीन खाते नजर आ रहे हैं जिसे देखकर लोगों में शनिवार सुबह को ग्रामीणों का आक्रोश देखने को मिला और पंचायत का घेराव किया
जल संकट से हाहाकार ‘हर घर नल योजना’ केवल कागजों में
गांव के करीब 800 परिवारों में जयसमंद परियोजना के तहत मात्र एक ही नल है वह पर भी कई महीनों से पानी नहीं आ रहा है ग्रामवासियों ने बताया कि ‘हर घर नल हर घर जल’ मिशन के तहत अब तक एक भी नया पाइप या कनेक्शन नहीं लगाया गया।
40–50 वर्ष पुरानी पाइपलाइनें टूट-फूट चुकी हैं और 8–10 फीट गहराई में दबने के कारण मरम्मत या नए कनेक्शन लेना अत्यंत कठिन हो गया है *सार्वजनिक शौचालय भी गंदगी से लदा पड़ा है* गांव में लगभग तीन लाख रुपये की लागत से बने सार्वजनिक शौचालय की स्थिति दयनीय है वहां न तो बोरवेल है न ही पानी की टंकी जिसके कारण शौचालय पूरी तरह निष्क्रिय पड़ा है शौचालय के दरवाजे भी टूट चेके है दीवारें भी जर जर और व्यवस्था नाममात्र की गई है।
पशु चिकित्सालय बना हुआ है
ग्रामवासियों ने बताया कि दो वर्ष पूर्व बने पशु चिकित्सालय अभी तक चालू नहीं हुआ है और जाने का कोई पक्का रास्ता नहीं है बरसात के दिनों में वहां पहुंचना लगभग असंभव हो जाता है
एक पेड़ मां के नाम को लेकर
सरकार ने ग्राम पंचायत में सालाना 5 लाख की लागत से पौधशाला (नर्सरी) बनाई गई है जो पूरी तरह से उजड़ गई है एक भी पेड़ जीवित नहीं है न तो पौधे पनपे और न ही किसी ग्रामीण को वितरित किए गए लाखों का बजट सुखा गांव अंधेरे में डूबा सड़क पर लाइटों का अभाव गांव की मुख्य सड़कों और गलियों में स्ट्रीट लाइटें नहीं हैं, जिससे ग्रामीण रात के समय असुरक्षित महसूस करते हैं कई पुराने हैंडपंप भी वर्षों से बंद पड़े हैं, लेकिन ग्राम पंचायत अपने हाल में मस्त है
ग्रामीणों की चेतावनी ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन को स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे पंचायत समिति सेमारी का भी घेराव करेंगे *गांव के बड़े बुजुर्गों का कहना है* हम विकास की बातें तो सुनते हैं, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं दिखता। अब हम खामोश नहीं रहेंगे ग्रामवासियों की यह आवाज़ सिर्फ सुरकांड खेड़ा गांव की नहीं, बल्कि उन सैकड़ों गांवों की भी है जो आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस जनआक्रोश को कितनी गंभीरता से लेता है।

रिपोर्टर जितेन्द्र पंचोली

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