सलूम्बर। राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ की ओर से दो दिवसीय प्रांतीय शैक्षिक सम्मेलन का आयोजन 19 एवं 20 दिसंबर को श्रीगंगानगर में किया जाएगा। इस सम्मेलन में प्रदेशभर से शिक्षक प्रतिनिधि भाग लेंगे। संगठन के जिलाध्यक्ष स्वरूप सिंह शक्तावत ने जानकारी देते हुए बताया कि सलूम्बर जिले से दर्जनों शिक्षक प्रदेश अध्यक्ष शेर सिंह चौहान के नेतृत्व में गुरुवार शाम बस द्वारा सम्मेलन में भाग लेने के लिए रवाना हुए।
सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन शुक्रवार 19 दिसंबर को दोपहर 12 बजे किया जाएगा, जबकि खुले अधिवेशन और समापन कार्यक्रम शनिवार 20 दिसंबर को आयोजित होंगे। दो दिवसीय सम्मेलन में शिक्षा विभाग से जुड़े ज्वलंत मुद्दों, शिक्षक हितों और शैक्षिक उन्नयन से संबंधित विषयों पर व्यापक चर्चा की जाएगी।
जिलाध्यक्ष शक्तावत ने बताया कि सम्मेलन में पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने, टीएसपी प्रतिबंधित जिलों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों को उनके गृह जिलों में समायोजित करने तथा शिक्षा विभाग में तबादलों से लगी रोक हटाकर तृतीय श्रेणी सहित सभी संवर्गों के स्थानांतरण प्रारंभ करने पर विचार होगा। इसके साथ ही तृतीय श्रेणी से वरिष्ठ अध्यापक एवं वरिष्ठ अध्यापक से व्याख्याता संवर्ग की वर्षों से लंबित पदोन्नतियां शुरू कराने, शिक्षकों को बीएलओ सहित अन्य गैर-शैक्षणिक दायित्वों से पूर्णतः मुक्त करने जैसे विषयों पर मंथन किया जाएगा।
सम्मेलन के खुले मंच पर विभिन्न जिलों से आए शिक्षक प्रतिनिधि अपने सुझाव रखेंगे, जिनका संकलन कर सरकार को प्रस्ताव के रूप में भेजा जाएगा। इसमें न्यायालयीन प्रकरणों के निस्तारण तक वरिष्ठ अध्यापक, व्याख्याता व वाइस प्रिंसिपल को तदर्थ पदोन्नति देने, ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक-कर्मचारियों को 10 प्रतिशत विशेष ग्रामीण भत्ता देने, उप प्रधानाचार्य सेवा नियमों में संशोधन कर 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती से भरने, सेवा अवधि 7, 14, 21, 24 एवं 32 वर्ष पूर्ण करने पर पदोन्नत वेतनमान देने जैसी मांगें प्रमुख रहेंगी।
इसके अतिरिक्त शिक्षक संवर्ग की लंबे समय से चली आ रही वेतन विसंगतियों को दूर करने, केंद्र के अनुरूप तृतीय श्रेणी शिक्षकों का ग्रेड पे 4200, वरिष्ठ अध्यापक का 4800 एवं व्याख्याता का 5400 करने, साथ ही वर्ष 2006 से 2008 के बीच नियुक्त तृतीय श्रेणी शिक्षकों व प्रबोधकों के मूल वेतन में व्याप्त विसंगति को समाप्त कर 12,900 रुपये निर्धारित कराने पर भी चर्चा कर सरकार को मांगपत्र भेजने का निर्णय लिया जाएगा।