सलूम्बर। शहर की पहचान माने जाने वाले सेरिग तालाब की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। वर्षों से उपेक्षा का शिकार यह प्रमुख जलस्रोत अब सीवरेज, प्लास्टिक और कचरे के बोझ तले कराहता नजर आ रहा है। तालाब में गिर रहे गंदे नालों ने इसकी स्वच्छता और प्राकृतिक सुंदरता को गहरा आघात पहुंचाया है, जिससे आसपास के बाशिंदों को दुर्गंध और मच्छरों की बढ़ती समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
बढ़ता प्रदूषण, बढ़ती चिंता
तालाब में जमा गंदगी के कारण पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह ऐतिहासिक जलधरोहर पूरी तरह प्रदूषित हो सकती है।
हर शनिवार सफाई का संकल्प
नगर परिषद की ओर से ठोस पहल न होने पर शहरवासियों ने स्वयं मोर्चा संभाल लिया है। पर्यावरण प्रेमियों, युवाओं और वार्डवासियों ने जनसहयोग से सफाई अभियान की शुरुआत की है। प्रत्येक शनिवार को स्वयंसेवक तालाब के घाटों और किनारों पर जमा कचरे को निकालकर सफाई कर रहे हैं।
अभियान के दौरान आमजन से अपील की जा रही है कि तालाब में प्लास्टिक या अन्य कचरा न डालें और स्वच्छता बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
नगर परिषद से स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तालाब में गिर रहे नाले को अन्यत्र डायवर्ट किया जाए और नियमित सफाई की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का मानना है कि जब तक सीवरेज का स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक समस्या जड़ से खत्म नहीं होगी।उल्लेखनीय उपस्थिति
इस अभियान में महेश कुमार आमेटा, प्रहलाद पटेल, तस्दुक बोहरा, राकेश प्रजापत, शिवानंद पुरोहित, पूर्व पार्षद रामभरोसे, विष्णु सोनी, विमल कुमार भट्ट, शंकर लाल भोई, संतोष राठौड़, रामचंद्र सालवी, विमल आमेटा सहित कई समाजसेवियों और पर्यावरण प्रेमियों ने भाग लेकर सहयोग दिया।
जनसहयोग से शुरू हुआ यह प्रयास शहर में सकारात्मक संदेश दे रहा है, वहीं नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस जागरूकता को कितना गंभीरता से लेता है।