सलूम्बर। जिले में जल संरक्षण और पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन को लेकर प्रशासन ने व्यापक अभियान शुरू करने की तैयारी कर ली है। इसी क्रम में जिला मुख्यालय पर आयोजित समीक्षा बैठक में प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर ‘जल चौपाल’ आयोजित करने का निर्णय लिया गया। बैठक में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन तथा पुरानी बावड़ियों और तालाबों के संरक्षण को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला कलेक्टर ने कहा कि जल संकट से निपटने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि आमजन और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से जल संरक्षण अभियान में सहयोग करने की अपील की।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांवों में मौजूद पुराने जल स्रोतों की पहचान कर उनके संरक्षण और सफाई का कार्य प्राथमिकता से कराया जाए। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जल बचत के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए।बैठक में जलदाय विभाग, पंचायत राज विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। अधिकारियों ने बताया कि आगामी दिनों में
ग्राम पंचायत स्तर पर जल चौपाल आयोजित कर ग्रामीणों को जल संरक्षण के महत्व और पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए प्रेरित किया जाएगा।