सलूम्बर। बहुचर्चित किशोर कुमार शर्मा हत्याकांड में जिला एवं सेशन न्यायालय, सलूम्बर ने अहम फैसला सुनाते हुए हत्या, साक्ष्य मिटाने और लूट के मामले में तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। माननीय सेशन न्यायाधीश श्री रामेश्वर प्रसाद चौधरी ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत परिस्थितिजन्य एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए तीनों अभियुक्तों को दोषी ठहराया। साथ ही प्रत्येक पर 20-20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया।
अभियोजन के अनुसार किशोर कुमार शर्मा 13 अगस्त 2021 को अखबार के बंडल पहुंचाने के लिए घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। तीन दिन बाद धराल माता पहाड़ी क्षेत्र के जंगल में उनका शव बरामद हुआ। पुलिस जांच में सामने आया कि नरेश उर्फ नाथूलाल, दौलतराम और काली उर्फ काजल ने पहले साजिश रची, फिर किशोर का अपहरण कर जंगल में ले जाकर धारदार हथियार से हत्या कर दी। इसके बाद पहचान छिपाने का प्रयास किया और मृतक के एटीएम कार्ड से करीब 60 हजार रुपए भी निकाल लिए।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक एडवोकेट रणजीत पूर्बिया ने अभियोजन पक्ष की ओर से 26 गवाहों के बयान और 106 दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष पेश किए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से यह साबित हुआ कि मृतक की हत्या गले और श्वास नली पर धारदार हथियार से वार कर की गई थी।
सभी साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने तीनों आरोपियों को हत्या, आपराधिक षड्यंत्र, साक्ष्य नष्ट करने तथा लूट के अपराध में दोषी मानते हुए भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित किया। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पूरे मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह मौजूद नहीं था, फिर भी वैज्ञानिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अपराध सिद्ध हुआ।