सलूम्बर जिले में सेमारी तहसील में राजस्थान पेंशनर समाज उपशाखा सेमारी के अध्यक्ष वालीराम बुनकर के नेतृत्व में पेंशनरों ने सीसीए पेंशन नियम संशोधन विधेयक को केन्द्र सरकार द्वारा वापस लेने की मांग को लेकर उपखण्ड कार्यालय में ऑफिस कानूनगो देवीलाल सेवक को प्रधानमंत्री व वित्त मंत्री भारत सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बताया कि भारत सरकार ने संसद की मंजूरी के लिए वित्त विधेयक पेश करते समय भारत की संचित निधि से पेंशन देनदारियों पर व्यय के लिए केन्द्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमों और सिद्वातों की मान्यता के लिए एक अध्याय शामिल किया है। इसके माध्यम से सरकार को पेंशनभोगियों के बीच अंतर स्थापित करने का अधिकार मिल गया है, जो केन्द्रीय वेतन आयोग की स्वीकृति सिफारिशों पर लागु हो सकता है, और विशेष रूप से पेंशनभोगी की सेवानिवृति की तारीख या केन्द्रीय वेतन आयोग की स्वीकृति सिफारिश के संचालन की तारीख के आधार पर अंतर किया जा सकता है।
उक्त विधेयक के माध्यम से केन्द्र सरकार ने पेशनर्स को 8वें वेतन आयोग कि लाभ से वचित करने व पेंशनरों को तिथि के आधार पर वर्गो में बाटकर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लघंन किया है साथ ही डी.एस. नकारा मामले में दिनांक 17/12/1982 के सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ के ऐतिहासिक निर्णय को चुनौती दी है।
राजस्थान पेंशनर समाज इस हिटलरशाही वित विधेयक का घोर विरोध करता है, क्योकि 7 वीं सीपीसी जिसे 01/01/2016 से पहले और 01/01/2016 के बाद सेवानिवृत पेंशनभोगियों के बीच समानता बनाए रखनें के लिए सरकार द्वारा स्वीकार किया गया था, यह विधेयक इस प्रकार की समानता को खत्म कर देता है। इसके अलावा, जब से 8वीं सीपीसी की घोषणा की गई है, देश भर के पेंशनभोगी अपने पेंशन संशोधन और 01/01/2026 से पहले सेवानिवृति हुए पेंशनभोगियों और 01/01/2026 (8वी सीपीसी की सिफारिशों की आपेक्षित तिथि) के बाद सेवानिवृति होने वाले पेंशनभोगीयों के बीच समानता बनाए रखनें के बारे में चितित है। वर्तमान निर्णय पेंशनभोगियों पर एक बड़ा झटका है और इसलिए सरकार को इस पर पुनर्विचार करने और इसे वापस लेने की आवश्यकता है।
राजस्थान पेंशनर समाज के प्रदेश नेतृत्व के आहवान पर राजस्थान पेंशनर समाज उपशाखा सेमारी ने केन्द्र सरकार के इस निर्णय का घोर विरोध करते हुए उन्हें इस विधेयक पर पुनर्विचार कर पेंशनरों के हित में निर्णय लेने का अनुरोध किया गया है। बता दें कि यदि विधेयक में पेंशनरों पर कुठाराघात संबंधी बिंदु नही हटाए गए तो ‘राजस्थान पेंशनर समाज को पूरे प्रदेश में आंदोलनात्मक रुख अपनाने को मजबूर होना पडेगा। आज ज्ञापन के बाद आगे चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। उम्र के इस पड़ाव में पेंशनरों को सडक पर उतरने और आमरण अनशन पर बैठने की जिम्मेदारी सरकार की होगी।
ज्ञापन देने के दौरान उपाध्यक्ष शांतिलाल चौबीसा, सचिव दिलावर सिंह पंवार, कोषाध्यक्ष नानालाल चौबीसा, प्रेम सिंह शक्तावत, लालसिंह शक्तावत, भेरू सिंह शक्तावत, विजयराम कलासुआ, रणजीत सिंह शक्तावत, डूंगर सिंह शक्तावत, नारायण लाल बुनकर, वेलचन्द कलाल, दिनेश चौबीसा, अशोक चौबीसा,कैलाश जैन, जगदीश चौबीसा, रमेश बुनकर, लक्ष्मण लाल बुनकर मौजूद रहे।