
“नारायण” महामंत्र का जाप ही है जो वे देवर्षि बनें मीरा ने भी वही मंत्र, नरसी मेहता, और तुलसीदासजी ने भी। तुलसीदास कहते हैं -” निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट, छल छिद्र ना भावा ! बस आप नारायण नाम का जाप निर्मल मन से करें। जिस के पास मोह नहीं है, मोह न हो तो मोहन आएगा ही,कथा में महाराज उत्तम स्वामी जी ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का सरस वर्णन किया। बांसुरी की मधुर धुन में सभी भक्त आनंद रस से विभोर हो गए। अघासुर, बकासुर, शंकटासुर, पूतना वध के प्रसंग और कालिया नाग देह के प्रसंग में कहा कि सभी
मनुष्यों के सिर पर काल नाच रहा है, किंतु श्रीकृष्ण ने काल कालिया नाग के सिर पर नृत्य किया। कथा में महाराज उत्तम स्वामीजी ने गोवर्धन पूजा प्रसंग में कहा कि आप आज ग्लोबल वार्मिंग की बाते करते हो, हमारे श्रीकृष्ण ने तो 5250 वर्षों पूर्व ही पर्यावरण संरक्षण का सन्देश गोवर्द्धन पूजा कर 56 भोग लगाये गए। दादा गुरूदेव के मोक्ष दिवस पर ब्रह्म भोज और गुरुदेव उत्तम स्वामीजी महाराज द्वारा 108 कन्याओ की पूजा करके मानव समाज को सीख दी गई कि सनातन धर्म में बेटी की भी पूजा करके आशीर्वाद लिया जाता है। बेटी भी दुर्गा रूप में पूजित है। यह जानकारी गुरू भक्त मंडल के मीडिया प्रभारी चन्द्रशेखर मेहता ने दी। कथा में मुख्य यजमान कमलेश
पाटीदार,भोजन प्रसादी के यजमान उमेश बम,उमेश कंस्ट्रक्शन एवं परिवार,पौथी पूजा यजमान ओमप्रकाश टांक परिवार,आरती यजमान पारसमल आशीष सेठिया परिवार रहे। इस अवहर पर राजस्थान के पूर्व मंत्री श्रीचन्द्र कृपलानी और बीजेपी जिलाध्यक्ष महावीर सिंह, राजाराम भाई,क्षेत्रीय मंत्री विश्व हिन्दू परिषद राजस्थान प्रान्त,यशपाल सिंह सिसौदिया,जिला महामंत्री,विश्व हिन्दू परिषद जिला प्रतापगढ़,गजेन्द्र चंडालिया, वरिष्ठ भाजपा नेता, रवि सोनी रवि ओझा, प्रहलाद साहू, शरामपालसिंह चुण्डावत, सुनील भट्ट शिक्षा अधिकारी आदि ने गुरूदेव से आशीर्वाद लिया। कार्यक्रम का संचालन प्रकाश व्यास ने कियाWhatsApp us