भारत-पाकिस्तान तनाव के मूल कारण जम्मू-कश्मीर समस्या का स्थाई समाधान त्रिपक्षीय वार्ता से हो”

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उदयपुर। प्रकृति-मानव केंद्रित जन आंदोलन (NHCPM)राजसमंद जिला इकाई की बैठक भेरू शंकर की अध्यक्षता में पूर्बिया भवन,कांकरोली (राजसमंद) में आयोजित की गई । इसमें खास तौर पर *”भारत-पाकिस्तान के तनाव की मूल जड़- जम्मू कश्मीर समस्या का मूल कारण और स्थाई समाधान”* पर चर्चा हुई।सभी ने भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध विराम का स्वागत किया,क्योंकि किसी भी युद्ध से किसी समस्या का समाधान नहीं होता बल्कि पर्यावरण और जन-धन की भारी हानि होती है,जन कल्याण के बजट में कटौती करके युद्ध और हथियारों की होड़ में खर्च करना पड़ता है। भारत, पाकिस्तान सहित कई देशों में हथियारों का व्यापार/होड़ बढ़ जाती है तथा हथियार बनाने वाली कंपनियों का मुनाफा कई गुना जरूर बढ़ जाता है। चर्चा में यह बात उभर कर आई कि *जम्मू- कश्मीर समस्या का स्थाई हल इससे जुड़े तीनों पक्ष- भारत पाकिस्तान और जम्मू कश्मीर के लोग- के बीच त्रिपक्षीय वार्ता/सहमति से ही हो सकता है।क्योंकि गत 77 वर्षों में भारत-पाकिस्तान ने आपस में पांच बार युद्ध करके देख लिया, शिमला समझौता/द्विपक्षीय वार्ताएं कर ली,”नोटबंदी से आतंकवादियों की कमर तोड़ना”,धारा 370 समाप्त करना आदि तरीकों से भी जम्मू कश्मीर समस्या का स्थाई समाधान नहीं हुआ।*त्रिपक्षीय वार्ता में प्रकृति-मानव केंद्रित जन आंदोलन की निम्न राय पर भी विचार किया जा सकता है कि-*
(1)भारत और पाकिस्तान में स्थित जम्मू कश्मीर के दोनों हिस्सों को 1947 के पूर्व की तरह एक स्वतंत्र राज्य के रूप में कर दिया जाए,उसकी विदेश,रक्षा और मुद्रा विभाग “भारत-पाक के संयुक्त नियंत्रण/महासंघ” के कंट्रोल में रखा जाए।इससे भारत और पाकिस्तान दोनों की इच्छाएं पूरी हो रही है।
(2)जम्मू-कश्मीर की संघीय विधानसभा के पास जम्मू-कश्मीर का पर्यावरणीय, मानवीय और संवैधानिक-विधिक मामलों का कंट्रोल हो,
(3)शेष विषय जम्मू-कश्मीर के कुल 8 भौगोलिक क्षेत्रों के लोगों द्वारा निर्वाचित क्षेत्रीय विधान सभाओं को सौंप दिये जाए जम्मू कश्मीर के 8 तरह(जम्मू क्षेत्र, कश्मीर घाटी, लद्दाख,कारगिल, पूंछ-राजौरी, चिनाब घाटी,पूंछ,भिंबर, मीरपुर यानी पठवारी बोलने वालों का क्षेत्र तथा बाल्टिस्तान एवं गिलगिट यानी उतरी क्षेत्र) के क्षेत्र भौगोलिक क्षेत्र है जिनमें विभिन्न नस्लों के लोग रहते हैं उनकी निर्वाचित क्षेत्रीय विधान सभाओं को स्वायत्तता देने से वहां के लोग उनकी जरूरत के अनुसार अपना विकास कर सकेंगे।क्योंकि सन 1947 के बाद विकास की सारी ठेकेदारी केंद्र सरकार ने ले रखी है,चाहे सरकार किसी भी पार्टी की रही हो,इसलिए विकास का फायदा आम लोगों तक नहीं पहुंच पाया।
ग्लोबल वार्मिंग/जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर भारत,पाकिस्तान, बांग्लादेश और दक्षिण एशिया पर ही हो रहा है।जम्मू कश्मीर समस्या के इस स्थाई समाधान से दक्षिण एशिया में ग्लोबल वार्मिंग/जल परिवर्तन के संकट से भी काफी मुक्ति मिलेगी तथा आम जनता की मूलभूत जरूरतों को भी पूर्ण किया जा सकेगा।चर्चा में इस संगठन के ऑल इण्डिया कमेटी के सदस्य सोहनलाल, बृजमोहन,विजयेंद्र, प्रेमलाल, गोपीलाल, शंकर लाल,गीता देवी,गोपी लाल आदि ने भी अपने विचार प्रकट किये। यह जानकारी भेरू शंकर,अध्यक्ष, प्रकृति मानव केंद्रित जन आंदोलन राजसमंद जिला इकाई ने दी।

रिपोर्टर नारायण सेन

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