सलूम्बर की नगीना बाड़ी को 11 सालों बाद मिला न्याय*शहरवासियों में खुशी की लहर

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

 सलूम्बर। जनसाधारण के हितार्थ एक सार्वजनिक महत्व की धरोहर के संरक्षण के उद्देश्य से सलूंबर नगर के हृदय नगीना बाड़ी के नाम से एक अत्यंत प्राचीन एवं ऐतिहासिक महत्व का स्थान तेजानंद बिहारी मंदिर राजकीय  देवस्थान विभाग की परिसर में विद्यमान था जिसमें एक कलात्मक बावड़ी एक प्राचीन शिवलिंग मंदिर एक छतरी जो समय के साथ क्षतिग्रस्त हो गई तथा कई ऐतिहासिक दीवारें स्थित थी। इन संरचनाओं का निर्माण लगभग दो शताब्दी पूर्व हुआ था जो इस स्थल को पुरातत्व की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताती है इस राजकीय एवं पुरातत्व महत्व की संपत्ति नगीना बाड़ी का स्वामी दर्शाते हुए दिनांक 26 जून 2013 को एक विक्रय विलेख के जरिए राजेश्वर सिंह की पक्ष में निष्पादित एवं पंजीकृत करवा दिया एवं उक्त संपत्ति को खुर्द बुर्द कर उस पर व्यावसायिक उपयोग करने पर राजेश्वर सिंह उतारू था। उक्त अवैध कृत्य एवं राष्ट्रीय धरोहर के विनाश के विरुद्ध विभिन्न स्तरों पर सलूंबर के सजग नागरिकों द्वारा संबंधित अधिकारियों को विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया परंतु उस पर सुनवाई नहीं हुई जिससे व्यथित होकर प्रमोद बाहेती, महेशचंद्र आमेटा और प्रहलाद पटेल ने नगरवासियों की ओर से प्रतिनिधित्व किया। इस पर प्रतिनिधि के रूप में एक वाद बाबत निषेधाज्ञा अंतर्गत धारा 38 और 39 सी निर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम का पठित धारा 91 सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत के अंतर्गत धारा 91 दि. प्र. संहिता के न्यायालय अनुमति के साथ सन 2014 में प्रस्तुत किया जिसका प्रकरण 10/2024 में दर्ज होकर विभिन्न विभाग व्यक्तियों के विरुद्ध प्रकरण चला जिससे प्रेरित होकर बाद में विभाग की नींद खुली और उक्त संपत्ति को लेकर बाद में विभाग द्वारा भी एक प्रकरण विक्रय पत्र अवैध घोषित कराने करने व वादी का हित प्रलोभन का एक वाद पत्र अपर जिला जिला एवं सेशन न्यायालय में प्रस्तुत किया। दोनों प्रकरणों में तमाम गवाह व सबूतों को सुनने के बाद सिविल न्यायालय एवं अपर जिला न्यायालय की ओर से निर्णय पारित किया गया जिसमें अपर जिला न्यायालय द्वारा अपने निर्णय दिनांक 29 मार्च 2025 को प्रतिवादीगण श्रीमती गायत्री सिंह एवं अन्य के विरुद्ध विक्रय पत्र को विधि शून्य घोषित किया गया जिसमें पैरवी अपर लोक अभियोजक नाहर सिंह चुंडावत द्वारा की गई वह सिविल न्यायालय पीठासीन अधिकारी पल्लवी बोहरा ने प्रकरण संख्या 10/ 2024 को वाद पत्र को डिक्री करते हुए दिनांक 16 मई 2025 के अपने निर्णय में प्रतिवादी संख्या 6 राजेश्वर सिंह को स्थायी निषेधाज्ञा द्वारा कठोरतापूर्वक पाबंद कर वाद पत्र में वर्णित नगीना बाड़ी नामक स्थल श्री तेजानंद बिहारी मंदिर सलूंबर का अविभाज्य भाग है, में किसी प्रकार की ओर,कोई तोड़ फोड़ तत्काल प्रभाव से नहीं करेगा और उसका वर्तमान स्वरूप किसी भी प्राचीन दीवार,कुंड, चबूतरे या किसी भी प्रकार से ध्वस्त या क्षतिग्रस्त नहीं करेगा और ना ही वहां कोई नवीन निर्माण करेगा नहीं किसी भी परिस्थिति में इसका व्यावसायिक उपयोग करेगा और ना ही श्री तेजानंद बिहारी मंदिर की भूमि की ओर से कोई नवीन अनाधिकृत रास्ता खोलेगा व प्रतिवादी संख्या 1 से 5 को उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया। उक्त पूरे प्रकरण में पैरवी समाजसेवी अधिवक्ता राकेश प्रजापत द्वारा की गई। इस प्रकरण के लिए एक प्रार्थना पत्र सलूम्बर के जागरूक नगरवासियों कैलाश गांधी नन्दलाल सुथार प्रहलाद पटेल रमेश उस्ता शंकरलाल भोई दामोदर सोनी सत्यनारायण टेलर आदि ने देवस्थान विभाग को संज्ञान में लाने के लिए लिखा था। उक्त न्यायिक निर्णयों से सलूंबर नागरिवासियों में हर्ष की लहर छा गई यह लगभग 11 वर्षों की लंबी कानूनी कार्यवाही एवं लड़ाई के बाद आज नगीना बड़ी को न्याय मिला है यह जानकारी एडवोकेट राकेश प्रजापत ने दी।

रिपोर्टर नारायण सेन

और पढ़ें

error: Content is protected !!