सलूम्बर। जिले में वन अधिकार पट्टों को खारिज किए जाने के विरोध में मंगलवार को बड़ी संख्या में काश्तकार जिला मुख्यालय पहुंचे और जनसुनवाई के दौरान वन विभाग के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वर्षों से काबिज भूमि पर खेती करने के बावजूद उनके दावे निरस्त कर दिए गए, जिससे आदिवासी एवं ग्रामीण परिवारों में भारी नाराजगी है।
जनसुनवाई में पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि वन अधिकार कानून के तहत पात्र परिवारों को पट्टे दिए जाने चाहिए थे, लेकिन विभागीय स्तर पर बिना उचित जांच के आवेदन खारिज कर दिए गए। ग्रामीणों ने दावा किया कि कई परिवार पीढ़ियों से भूमि पर खेती कर रहे हैं और उनके पास स्थानीय स्तर के दस्तावेज व प्रमाण भी मौजूद हैं।
काश्तकारों ने आरोप लगाया कि वन विभाग द्वारा की गई कार्रवाई से गरीब किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इस दौरान महिलाओं और बुजुर्गों ने भी अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं और निष्पक्ष जांच कर पात्र लोगों को अधिकार दिलाने की मांग की।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि खारिज किए गए दावों की पुनः समीक्षा नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जनसुनवाई के दौरान काफी देर तक विरोध और नारेबाजी का माहौल बना रहा। प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को नियमानुसार जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
बताया जा रहा है कि जिले के कई गांवों में वन अधिकार पट्टों को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है और बड़ी संख्या में लोग अपने दावों के पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।