

गतिविधियों के कारण जहां एक तरफ मानव सहित संपूर्ण जीव-जगत के जिंदा रहने के लिए अति आवश्यक शुद्ध हवा-पानी,पौष्टिक जैविक रसायन मुक्त भोजन की अभूतपूर्व कमी बढ़ती जा रही है,प्रदूषण बढ़ने से धरती का तापमान भी हर साल बढता जा रहा है,परिणाम स्वरूप मानव सहित संपूर्ण जीव जगत का अस्तित्व ही खतरे में आ गया है।वहीं दूसरी तरफ भयंकर बेरोजगारी,भ्रष्टाचार,अपराध,युद्ध,हथियारों की होड़,सामाजिक असुरक्षा,महंगी शिक्षा और चिकित्सा के हालात बढ़ते जा रहे हैं। इसलिए धन,निजी स्वार्थ की बजाय मानव सहित शुद्ध हवा-पानी, पौष्टिक/जहर मुक्त भोजन,जीवन लायक तापमान वाला वातावरण बनाने के लिए आधुनिक-प्राकृतिक/जहर मुक्त- सहकारी कृषि को हमारे कृषि प्रधान देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था में प्राथमिकता देते हुए इसमें सभी सरकारों के बजट का 50% हिस्सा निवेश किया जावे।साथ ही सभी लोगों खासकर गरीबों/वंचितों की न्यूनतम बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित करने और सामाजिकता का भाव बढ़ाने वाली,उचित समता तथा जन भागीदारी वाली,देशों के अंदर और देशों के बीच मौजूद विवादों का समाधान टकराहट/युद्ध की बजाय संबंधित पक्षों में बातचीत/सहमति द्वारा करने वाली पारदर्शिता वाली व्यवस्था बनाने के बारे में हमे अपने संपर्क के लोगों,संगठनों और मानव जाति को जागरूक और संगठित करने की जरूरत है।साथ ही जन आंदोलन के अध्यक्ष रिटायर्ड प्रधानाचार्य भेरूशंकर,केलवा प्रशासक प्रतिनिधि सुनील साहू,पसूंद के पूर्व सरपंच बंशी लाल,गणपत पालीवाल,कैलाश चंद्र,विजयेंद्र ने भी बताया कि हम सबको व्यक्तिगत स्तर पर भी बिजली और वाहनों का अनावश्यक उपयोग,पॉलिथीन की बजाय कपड़े की थैलियों का उपयोग,पक्षियों हेतु दाना-पानी की व्यवस्था,पौधारोपण एवं उनकी नियमित सिंचाई,नरेगा श्रमिकों द्वारा विलायती बबूलों और गाजर घास को जड़ सहित कटाकर वहां पौधारोपण करने आदि करने योग्य कार्य करने की जरूरत है।यह जानकारी पूर्व प्रांतीय सचिव सोहन लाल रेगर ने दीWhatsApp us