
सुखाड़िया विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र के सेवानिवृत आचार्य प्रोफेसर संजय लोढा थे। आचार्य प्रोफेसर संजय लोढा ने आदिवासी समाज की आदिवासी समाज की अनौपचारिक न्याय व्यवस्था जिसें जाजम प्रथा भी कहा जाता है, पर प्रकाश डाला और कहा कि आज भी क्षेत्र में जाजम व्यवस्था के माध्यम से आदिवासी समाज के आपसी विवादों को हल किया जाता है जिससे समाज में सामाजिक समरसता बनी रहती है आपने
कैलाशपुरी गांव में जाजम व्यवस्था का गहन विश्लेषण और अध्ययन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात के अंग्रेजी विभाग के आचार्य प्रोफेसर सुरेश कुमार अग्रवाल ने की। आचार्य प्रोफेसर सुरेश कुमार अग्रवाल प्रोफेसर देवासी के सामाजिक चिंतन और आदिवासी जीवन की
वास्तविकताओं की समझ का विश्लेषण करते हुए कहा कि प्रोफेसर दोषी ने आदिवासी समाज को राष्ट्र की मुख्य धारा के साथ जोड़ने का प्रयास किया आपके द्वारा समाज के बारे में जो लेखन किया गया वह आज भी प्रासंगिक है। कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रोफेसर दोषी के मित्र प्रक्रिया बी.के नागला और एस. एल.शर्मा द्वारा प्रेषित संदेशों का वाचन किया गया जिसमें उन्होंने प्रोफेसर दोषी का आदिवासी समाज के उत्थान के बारे में किए गए अध्ययनों का उल्लेख किया और इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय समाजशास्त्रियों ने भाग लिया इनमें प्रोफेसर एन के भार्गव प्रोफेसर मोहन आडवाणी प्रोफेसर सुरेश राजोरा, प्रोफेसर एस. एल. मेनारिया और प्रोफेसर अरुण चतुर्वेदी भी शामिल थे। कार्यक्रम में प्रोफेसर पी.सी.जैन एवं डॉ. नेहा जैन द्वारा लिखित पुस्तक भारत में समाज का अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर पीसी जैन ने किया और प्रोफेसर दोषी के सुपोत्र डॉ कृष्णा दोषी ने धन्यवाद ज्ञापित कियाWhatsApp us