
ने बताया कि आश्रम में की गई चिकित्सा, सेवा और उपचार के कारण प्रभु जी के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार होने लगा और वह अपने बारे में कुछ जानकारी देने लगे और अपना नाम नीलेश बताया जिला बांसवाड़ा बताया। कार्यालय प्रभारी सुल्तान सिंह के निरंतर प्रयास से प्रभुजी की बहिन से संपर्क हो पाया। बहिन सरिता देवी से नीलेश प्रभुजी की बात कराई गई। आश्रम की सूचना पर प्रभुजी के छोटे भाई हिमांशु और चचेरे भाई पिंटू कुमार उनके लेने आश्रम आए। हिमांशु ने बताया कि 25 दिसंबर 2024 को बड़े भाई का निधन हो गया जिसके बाद इनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया और वह घर से निकल गए
बांसवाड़ा और उसके आसपास के क्षेत्र में इनको बहुत ढूंढा परंतु उनके बारे में कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई। जब उदयपुर आश्रम से इनके बारे में सूचना। मिली तो परिवार में खुशियां छा गई। पिंटू कुमार ने कहा कि अपना घर आश्रम की सेवा अवर्णनीय हैं।WhatsApp us