प्रतापगढ़ रामद्वारा में श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान गंगा महोत्सव का हुआ विराम दिवस आज महाप्रसादी का आयोजन, संत श्री शंभूराम जी महाराज बोले — “गौ माता की सेवा में सदैव तत्पर रहें”

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प्रतापगढ़।
अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के प्रतापगढ़ स्थित रामद्वारा में चल रहे श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान गंगा महोत्सव का आज (4 नवंबर, मंगलवार) विराम दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर समस्त व्यास शर्मा परिवार की ओर से कथा के पश्चात महाप्रसादी का आयोजन होगा, जिसमें अनेक भक्त धर्मलाभ प्राप्त करेंगे।रामद्वारा ट्रस्ट के हितेश राजसोनी ने बताया कि आयोजन में विशेष सेवा देने वाले भक्तों का सम्मान भी किया जाएगा। कथा वाचक संत श्री शंभूराम जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि “प्रतापगढ़ रामद्वारा आस्था और श्रद्धा का केंद्र है। यहां आने वाले भक्तों की मन्नतें सदैव पूरी होती हैं। जो भी पूर्ण निष्ठा और विश्वास के साथ गुरु दरबार में प्रार्थना करता है, उसे कभी निराशा नहीं मिलती।”
संत श्री ने कथा में श्रीकृष्ण-गोपियों के अनन्य प्रेम प्रसंग, उद्धव को भक्ति ज्ञान, श्रीकृष्ण का गुरुकुल गमन, शिशुपाल वध, कालनेमी राक्षस का संहार, अर्जुन को गीता उपदेश एवं श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि रुक्मणी विवाह के हथलेवा में प्राप्त सेवा राशि को रामस्नेही गौशाला रायपुर हेतु समर्पित किया गया है, जो गायों की सेवा, संरक्षण व खाद्य सामग्री में उपयोग होगी। संत श्री शंभूराम जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा “गौ सेवा का अवसर जब भी मिले, उसे अवश्य ग्रहण करना चाहिए। भक्ति का अर्थ है परमात्मा के साक्षात्कार की अनुभूति। बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार भी मिलना चाहिए, जो गुरु और संतों के सानिध्य से ही संभव है।” उन्होंने कहा कि सहनशीलता संतों का प्रमुख गुण है — क्रोध नहीं करना चाहिए, करुणा और समानता का भाव रखना चाहिए। “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का भाव केवल सनातन धर्म में ही है।कार्यक्रम के समापन पर आरती एवं विशाल भंडारा आयोजित हुआ, जो देर शाम तक चलता रहा। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं सेवाभावी भक्तों ने भाग लिया।

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