राजस्थान विद्यापीठ के 21वें दीक्षांत समारोह में सलूंबर के सीआरपीएफ कमांडेंट विनोद त्रिवेदी को डॉक्टरेट की उपाधि देश की आंतरिक सुरक्षा पर किया उत्कृष्ट शोध — जल्द प्रकाशित होगी पुस्तक
सलूंबर। जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ, उदयपुर के 21वें दीक्षांत समारोह में सलूंबर उपखंड के ग्राम बरोड़ा निवासी एवं सीआरपीएफ के वरिष्ट अधिकारी विनोद पीतांबर त्रिवेदी को पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की गई। उन्हें यह उपाधि एनसीटीई अध्यक्ष द्वारा प्रदान की गई। त्रिवेदी ने “भारत की समकालीन आंतरिक सुरक्षा: संरचना, चुनौतियां और सुधार” विषय पर शोध कार्य पूरा किया है।
सीआरपीएफ में कमांडेंट पद पर कार्यरत त्रिवेदी ने ऑपरेशनल व अकादमिक दोनों क्षेत्रों में समान दक्षता का परिचय दिया है। उनका यह शोध देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर केंद्रित है, जिसे वे आगे चलकर एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने का इरादा रखते हैं ताकि इससे सीआरपीएफ, अन्य सुरक्षा बलों, शिक्षाविदों और आम जनता को लाभ मिल सके।
अपने शोध के दौरान उन्होंने आंतरिक सुरक्षा, पुलिस और सीएपीएफ से जुड़ी संसदीय रिपोर्टें, आयोगों की सिफारिशें, शोध पत्र, लेख, पुस्तकें और अंतरराष्ट्रीय स्रोतों सहित 1000 से अधिक दस्तावेजों का अध्ययन किया।
त्रिवेदी ने सितंबर 2021 में अपना शोध कार्य शुरू किया, जो डॉ. अपर्णा श्रीवास्तव (राजस्थान विद्यापीठ) के मार्गदर्शन में पूरा हुआ। प्रो. हिमांशु प्रसाद रॉय, जो दिल्ली विश्वविद्यालय में कार्यरत थे और बाद में जेएनयू, नई दिल्ली में स्थानांतरित हुए, ने सह-मार्गदर्शक के रूप में योगदान दिया।
उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू, संसद पुस्तकालय और राजस्थान विद्यापीठ पुस्तकालयों से अध्ययन सामग्री प्राप्त की।
अपने शोध के दौरान त्रिवेदी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में देहरादून में आयोजित 49वीं अखिल भारतीय पुलिस विज्ञान कांग्रेस (AIPSC) में अपना पहला शोध पत्र प्रस्तुत किया, जिसे बीपीआरएंडडी ने अपने प्रमुख प्रस्तावों में शामिल कर गृह मंत्रालय को भेजा।
उनका एक अन्य शोध पत्र भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) की त्रैमासिक पत्रिका लोक प्रशासन में प्रकाशित हुआ, जिसमें भारत की आंतरिक सुरक्षा संरचना में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर बल दिया गया।
थीसिस को पाँच अध्यायों में विभाजित किया गया है —
पहला अध्याय: शोध का परिचय, साहित्य समीक्षा और उद्देश्य।
दूसरा अध्याय: आंतरिक सुरक्षा की वर्तमान संरचना।
तीसरा अध्याय: आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियां और खतरे।
चौथा अध्याय: सुधार, ऐतिहासिक दृष्टिकोण और विश्लेषण।
पाँचवां अध्याय: निष्कर्ष और सिफारिशें।
यह शोध 400 से अधिक पृष्ठों में विस्तृत है और सहकर्मी समीक्षा प्रक्रिया के दौरान पर्यवेक्षकों और परीक्षकों द्वारा अत्यंत उत्कृष्ट बताया गया।
विनोद त्रिवेदी का यह कार्य न केवल देश की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के नए आयाम खोलेगा, बल्कि यह भविष्य में एक संदर्भ ग्रंथ के रूप में भी कार्य करेगा।