सलूम्बर। बामनिया तालाब को लेकर ग्राम सालैया के कुछ व्यक्तियों द्वारा जिला प्रशासन को भ्रमित किए जाने का आरोप लगाते हुए तालाब से जुड़े ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर सलूम्बर को एक संयुक्त तथ्यात्मक ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि पूर्व में प्रस्तुत किए गए ज्ञापन ऐतिहासिक, राजस्व एवं भौतिक सच्चाई से परे हैं।
ग्रामीण प्रतिनिधियों रामेश्वर जी जोशी, नाथू सिंह राठौर, उदय सिंह, वगत सिंह, गजेंद्र सिंह, रूप सिंह, मान सिंह, ईश्वर सिंह, नवल सिंह पाटवी, लाल सिंह (पूर्व सरपंच), गौतम मेघवाल, नाथूलाल खराड़ी, तकत सिंह, केशर सिंह, हरमत सिंह ताजावत, नवल सिंह सहित समस्त ग्रामीणों ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन के समक्ष वास्तविक स्थिति रखी।
ग्रामीणों ने बताया कि बामनिया तालाब का निर्माण वर्ष 1740 में तत्कालीन मेवाड़ शासन की विधिवत अनुमति से हुआ था, जिसका निर्माण ग्रामवासियों द्वारा निजी खर्च से कराया गया। तालाब निर्माण के बाद से आज दिनांक तक इससे निरंतर सिंचाई होती आ रही है और राजस्व रिकॉर्ड में भूमि की किस्म तालाबी दर्ज है।
निकासी व्यवस्था पूरी तरह सुचारू
ज्ञापन में बताया गया कि वर्ष 2020 में प्रशासन व दोनों गांवों की मध्यस्थता से तालाब की निकासी (वेस्ट वीयर) की भराव क्षमता निर्धारित कर खुदाई व चौड़ाई की गई थी। वर्तमान में तालाब का जलस्तर निर्धारित लेवल से लगभग 4 फीट नीचे है। जलस्तर बढ़ने पर पानी स्वतः निकासी मार्ग से निकल जाता है, अतः जलभराव की शिकायतें तथ्यहीन हैं।
सड़क निर्माण में प्रशासनिक चूक
ग्रामीणों ने बताया कि करीब 10 वर्ष पूर्व सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा बनाई गई सड़क का लेवल तालाब की भराव क्षमता से नीचे रखा गया, जिससे सड़क पर पानी भरता है। इसे प्रशासनिक भूल बताते हुए सड़क का लेवल तालाब के जलस्तर के अनुसार तय करने की मांग की गई।
400 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई, भू-जल स्तर ऊंचा
बामनिया तालाब से बामनिया, राणावतावाड़ा, वागावतवाड़ा एवं जोशीवाड़ा गांवों की लगभग 400 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित हो रही है। तालाब के कारण आसपास के 15–20 किलोमीटर क्षेत्र में कुएं एवं नलकूप आज भी भरपूर पानी दे रहे हैं।
डूब क्षेत्र की भूमि को लेकर राजस्व विसंगति
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि तालाब की डूब में आने वाली भूमि पर वर्ष 1983 में तत्कालीन एसडीओ द्वारा गैर-खातेदारी अधिकार दर्ज किए गए थे, जबकि यह भूमि आज भी जलमग्न है और किसी भी काश्तकार का मौके पर भौतिक कब्जा नहीं है। वर्तमान में कुल 21 आराजियां, रकबा 37.11 हेक्टेयर गैर-खातेदारी के रूप में राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हैं, जो नियमों के विपरीत है।
बिलानाम दर्ज कराने की मांग
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से मांग की कि जमाबंदी वर्ष 2075–78, खाता संख्या 202 की उक्त भूमि को गैर-खातेदारी से हटाकर बिलानाम दर्ज कराया जाए, ताकि वर्षों से चली आ रही राजस्व त्रुटि का स्थायी समाधान हो सके।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन निष्पक्ष जांच कर ऐतिहासिक तथ्यों और जनहित को ध्यान में रखते हुए शीघ्र उचित निर्णय लेगा।