सलूम्बर में आदिवासी संस्कृति की झलक, माण्डली में फसली उत्सव पर गूंजी गेर की थाप

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सलूम्बर। झल्लारा क्षेत्र के माण्डली गांव में रविवार को आदिवासी समाज का 8वां फसली उत्सव और होली स्नेह मिलन कार्यक्रम बड़े उत्साह और परंपरागत रंग में आयोजित हुआ। हनुमानजी मंदिर के सामने हुए इस आयोजन में आसपास के गांवों से हजारों ग्रामीण, गेर टीमें, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। पूरे आयोजन में आदिवासी संस्कृति, परंपरा और आपसी भाईचारे का जीवंत स्वरूप देखने को मिला।
उत्सव का मुख्य आकर्षण पारंपरिक गेर नृत्य रहा, जिसमें युवाओं और बुजुर्गों ने आदिवासी वेशभूषा पहनकर उत्साहपूर्वक भाग लिया। ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच प्रतिभागियों ने गोल घेरा बनाकर गेर खेली और अपनी संस्कृति की अनूठी झलक प्रस्तुत की।
गेर में शामिल युवाओं ने पैरों में घुंघरू बांधे, हाथों में तलवारें और लाठियाँ थामे तथा सिर पर रंग-बिरंगी पगड़ियां पहनकर तालबद्ध नृत्य किया। तलवार और डंडों के साथ किए गए इस पारंपरिक प्रदर्शन ने वीरता और परंपरा की छटा बिखेर दी। घुंघरुओं की मधुर आवाज और ढोल की गूंज के बीच पूरा वातावरण उत्सवमय बन गया, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से ग्रामीण पहुंचे।
इस अवसर पर बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत, धरियावद विधायक थावरचंद डामोर, आसपुर विधायक उमेश डामोर, राष्ट्रीय सदस्य कांति भाई आदिवासी, उदयपुर सांसद प्रत्याशी प्रकाश बूज, BPMM राष्ट्रीय संयोजक निलेश बरोड़ और सलूम्बर जिला अध्यक्ष आनंद बूज सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
जनप्रतिनिधियों ने भी पारंपरिक वेशभूषा में समाज के लोगों के साथ गेर खेलकर उत्सव में भाग लिया और क्षेत्रवासियों को होली व धूलंडी की शुभकामनाएं दीं।
इस आयोजन ने एक बार फिर आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और सामूहिक उत्साह की मिसाल पेश की।

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