खेत बचाओ अभियान: बस्सी में कल जुटेगा किसानों और वैज्ञानिकों का महाकुंभ, मृदा स्वास्थ्य और आधुनिक खेती पर होगा सीधा संवाद

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सलूंबर। बदलते मौसम और कृषि क्षेत्र में आ रही आधुनिक चुनौतियों के बीच किसानों की आय बढ़ाने और उनकी भूमि को उपजाऊ बनाए रखने के उद्देश्य से सलूम्बर जिले में एक बेहद महत्वपूर्ण कार्यक्रम होने जा रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग योजना ब्यूरो (NBSS & LUP), क्षेत्रीय केन्द्र, उदयपुर द्वारा “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत एक दिवसीय किसान–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 10 जून 2026 को प्रातः 10:30 बजे ग्राम पंचायत भवन, बस्सी (तहसील व जिला सलूम्बर) में आयोजित होगा। ​इस विशेष संवाद कार्यक्रम का मूल उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती से ऊपर उठाकर वैज्ञानिक पद्धतियों से जोड़ना है। कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, टिकाऊ कृषि पद्धतियों, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण, फसल सुरक्षा तथा खेतों को विभिन्न कीट एवं रोगों के प्रकोप से बचाने के वैज्ञानिक उपायों की विस्तृत जानकारी प्रदान की जाएगी। विशेष रूप से, किसानों को मृदा प्रदूषण की रोकथाम हेतु रासायनिक उर्वरकों के विवेकपूर्ण एवं संतुलित उपयोग, मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन, जैविक एवं जैव-उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने तथा फसलों में अनावश्यक उर्वरक उपयोग को कम करने की वैज्ञानिक तकनीकों से अवगत कराया जाएगा। इस अवसर पर वैज्ञानिक किसानों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी कृषि संबंधी समस्याओं का समाधान करेंगे तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकी सुझाव प्रदान करेंगे। इस कार्यक्रम में बस्सी और आसपास के क्षेत्रों से लगभग 125 प्रगतिशील किसानों के शामिल होने की संभावना है, जिसमें कृषि क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए महिला कृषकों की सक्रिय भागीदारी विशेष रूप से सुनिश्चित की जाएगी। कार्यक्रम में उपस्थित होने वाले किसानों को खरीफ मौसम की तैयारियों, मृदा परीक्षण के महत्व, संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी की उर्वरता एवं स्वास्थ्य को बनाए रखने के उपाय, मृदा एवं जल प्रदूषण को कम करने की तकनीकें, जल संरक्षण तथा फसल प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। आईसीएआर-एनबीएसएस एंड एलयूपी, क्षेत्रीय केन्द्र, उदयपुर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आर. पी. शर्मा ने इस अभियान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि “खेत बचाओ अभियान” का उद्देश्य किसानों में वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना, मिट्टी को प्रदूषण एवं क्षरण से बचाना, रासायनिक आदानों के संतुलित उपयोग को प्रोत्साहित करना तथा खेतों की उत्पादकता एवं स्थिरता को बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए “जितनी आवश्यकता उतना उर्वरक” की अवधारणा को अपनाना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है। उन्होंने क्षेत्र के समस्त किसानों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में बस्सी ग्राम पंचायत भवन पहुंचकर वैज्ञानिकों से सीधा संवाद स्थापित करें और अपनी कृषि संबंधी समस्याओं का मौके पर ही समाधान पाएं। कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने वाला यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम ग्राम पंचायत बस्सी एवं कृषि विभाग के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया जा रहा है, ताकि धरातल पर किसानों को इसका सीधा लाभ मिल सके। स्थानीय प्रशासन और कृषि अधिकारियों ने मिलकर कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

संवाददाता: नाथूलाल सालवी

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