20 वर्ष पुराना पवित्र बेलपत्र वृक्ष जड़ से उखाड़ा, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा रात्रि ग्राम सभा में उठा सवाल— “बिना अनुमति पेड़ क्यों हटाया?” प्रधानाध्यापक बोले– “मुझे कुछ नहीं पता”, ग्रामीणों ने निर्माण कार्य रुकवाया

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सलूम्बर जिले की ग्राम पंचायत बामनिया के अंतर्गत रूआंव गांव स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय रूआंव में विद्यालय
प्रशासन की कथित मनमानी को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। विद्यालय परिसर में वर्षों से मौजूद लगभग 20 वर्ष पुराना पवित्र बेलपत्र (बिल्व पत्र) का पेड़, जिसे ग्रामीण भगवान शिव की पूजा-अर्चना में उपयोग करते आ रहे थे, उसे जड़ से उखाड़कर परिसर से बाहर फेंक दिया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा कार्य विद्यालय के अध्यापक एवं स्टाफ की मौजूदगी में किया गया, जबकि न तो ग्राम पंचायत से अनुमति ली गई और न ही विद्यालय की एसएमसी (स्कूल प्रबंधन समिति) से कोई सहमति प्राप्त की गई।
घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने रात्रि में ग्राम सभा आयोजित कर विद्यालय के स्थानीय अध्यापक से सीधा सवाल किया कि ग्रामवासियों की अनुमति के बिना पवित्र बेलपत्र का पेड़ क्यों हटाया गया? इस पर संबंधित अध्यापक ने जवाब दिया— “मुझे इसके बारे में कुछ भी जानकारी नहीं है।”
ग्रामीणों ने इसे प्रधानाध्यापक के दायित्व से पलायन बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया और सवाल उठाया कि प्रधानाध्यापक होने के नाते विद्यालय की संपत्ति और आस्था से जुड़े विषयों की जिम्मेदारी बनती है या नहीं?

ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय परिसर में पहले से ही दो पुराने जर्जर कमरे मौजूद हैं, जिन्हें तोड़कर उसी स्थान पर नए कमरों का निर्माण किया जा सकता था। इसी मांग को लेकर ग्रामीणों द्वारा प्रार्थना पत्र भी दिया गया, लेकिन इसके बावजूद बिना सहमति नई नींव खुदवाने का कार्य शुरू कर दिया गया।
जैसे ही मामले की जानकारी ग्रामीणों को मिली, रूआंव गांव के मौजिज मुखिया गुलाब सिंह गदरावत एवं देवी सिंह ईदावत मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के सहयोग से उन्होंने निर्माणाधीन दो कमरों का कार्य तुरंत रुकवाया।
इस दौरान हुडावत चंदन सिंह एवं हिम्मत सिंह हमावत भी मौके पर मौजूद रहे और पेड़ को जड़ से उखाड़े जाने व नींव खुदाई जैसे मनमाने कार्यों का कड़ा विरोध किया।
ग्रामीणों का कहना है कि बेलपत्र का पेड़ केवल पर्यावरण का हिस्सा नहीं था, बल्कि धार्मिक आस्था और गांव की परंपरा से जुड़ा प्रतीक था। इसे हटाना ग्रामीण भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है।
घटना को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में विद्यालय परिसरों में इस प्रकार की मनमानी दोबारा न हो।

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