हाईवे से हटेंगे 2216 अतिक्रमण दो महीने की सख्त समय-सीमा, दोबारा कब्जा हुआ तो अफसर होंगे जिम्मेदार

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राजस्थान में नेशनल हाईवे पर बने अवैध निर्माणों को लेकर उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि ‘राइट ऑफ वे’ में आने वाले सभी 2216 अतिक्रमणों को दो महीने के भीतर हटाया या वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।
सड़क सुरक्षा को बताया मौलिक अधिकार अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है, जो संविधान के अनुच्छेद-21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार से जुड़ा है। हाईवे पर किसी भी प्रकार का अवरोध न केवल यातायात व्यवस्था को प्रभावित करता है, बल्कि आमजन की सुरक्षा से भी समझौता है।

धार्मिक ढांचे भी दायरे में

सरका री आंकड़ों के अनुसार नेशनल हाईवे की सीमा में 103 मंदिर, मस्जिद और अन्य धार्मिक संरचनाएं भी शामिल हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कानून के दायरे में सभी प्रकार के अवैध निर्माणों पर समान रूप से कार्रवाई की जाएगी।
दोबारा अतिक्रमण पर सख्ती
कोर्ट ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि हटाए गए स्थानों पर दोबारा अतिक्रमण होता है तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माने जाएंगे।
प्रशासन की बढ़ी जिम्मेदारी
अब राज्य सरकार, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और जिला प्रशासन के सामने तय समय में कार्रवाई की चुनौती है। हाईवे किनारे बसे दुकानदारों, धार्मिक ट्रस्टों और अन्य अतिक्रमणकर्ताओं के लिए यह आदेश बड़ा संकेत है कि कानून से ऊपर कोई नहीं।

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