सलूंबर। जिले के राजस्व गांव सालैया में तालाब की जल निकासी बाधित होने से हालात चिंताजनक बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि 171 बीघा तालाब पेटा के साथ-साथ करीब 187 बीघा खेतीहर जमीन पानी में डूबी हुई है। जलभराव के कारण गांव का मंदिर, श्मशान घाट, मुख्य आवागमन मार्ग और पेयजल के पांच कुएं भी प्रभावित हो गए हैं। लगातार बनी इस स्थिति से ग्रामीणों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और कई परिवार पलायन की तैयारी में हैं।
चार ज्ञापनों के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों ने एक बार फिर जिला कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपते हुए त्वरित समाधान की मांग की है। इससे पूर्व 31 अक्टूबर, 17 नवंबर, 26 नवंबर और 1 दिसंबर 2025 को भी प्रशासन को लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि आश्वासन तो मिलते रहे, पर जमीन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
30 फीट निकासी बिंदु की मांग
ग्रामवासियों के अनुसार वर्ष 2019 में तालाब के लिए 30 फीट का निकासी बिंदु तय किया गया था, मगर खुदाई केवल 12 फीट तक ही हो पाई। इसी कारण पानी की स्वाभाविक निकासी रुक गई और जलभराव की स्थिति बन गई। पटवारी द्वारा मौके का निरीक्षण कर उपखंड अधिकारी को रिपोर्ट भी भेजी जा चुकी है, जिसमें डूब क्षेत्र की पुष्टि की गई है।
ग्रामीणों की मांग है कि निकासी बिंदु को निर्धारित 30 फीट तक दोबारा खुदवाया जाए तथा बंद पड़ी जल निकासी खिड़कियों को तत्काल खोला जाए।
अवैध मछली पालन के आरोप
ज्ञापन में तालाब में बिना अनुमति मछली पालन किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र हस्तक्षेप नहीं किया तो और अधिक परिवार गांव छोड़ने को विवश होंगे।
‘ग्राम सालैया बचाओ अभियान समिति’ की चेतावनी
‘ग्राम सालैया बचाओ अभियान समिति’ ने प्रशासन से जल निकासी बहाल करने, अवैध गतिविधियों की जांच करने और प्रभावित किसानों को राहत पैकेज देने की मांग की है। समिति ने स्पष्ट किया है कि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
ग्रामीण अब प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा में हैं, ताकि खेतों और गांव को जलभराव की समस्या से राहत मिल सके।