सलूम्बर। अंधविश्वास और जादू-टोने के संदेह में एक व्यक्ति की निर्मम हत्या करने के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय सलूम्बर ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने माना कि आरोपी द्वारा की गई हिंसक मारपीट के कारण ही पीड़ित की मृत्यु हुई, जिसके पर्याप्त साक्ष्य अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए।
ममले के अनुसार सड़ा मानपुर निवासी पालूराम मीणा के साथ अक्टूबर 2024 में देर रात मारपीट की घटना हुई थी। आरोप था कि आरोपी खाताराम को मृतक पर जादू-टोना करने का संदेह था। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और आरोपी ने लाठी, लोहे की अंगूठी तथा लात-घूंसों से हमला कर दिया। गंभीर चोटों के चलते पालूराम की कई पसलियां टूट गईं और उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
मटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। अनुसंधान में घटना में प्रयुक्त लाठी बरामद की गई तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट, विसरा जांच और अन्य चिकित्सकीय साक्ष्यों से हत्या के आरोपों की पुष्टि हुई। न्यायालय में सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य भी अभियोजन के पक्ष में मजबूत साबित हुए।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री रामेश्वर प्रसाद चौधरी ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी खाताराम को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास तथा 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही अन्य धाराओं के तहत भी पृथक-पृथक कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया गया।
अपने निर्णय में न्यायालय ने कहा कि अंधविश्वास के आधार पर किसी व्यक्ति की जान लेना गंभीर और जघन्य अपराध है। ऐसे मामलों में कठोर दंड समाज में कानून के प्रति विश्वास और अपराधियों में भय बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
प्रकरण में राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक रणजीत कलाल पुर्बिया ने पैरवी करते हुए अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर आरोपी का अपराध संदेह से परे सिद्ध हुआ और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई।