सलूम्बर। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को न्याय दिलाने की दिशा में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल एक बार फिर कारगर साबित हुई। पॉक्सो एक्ट से जुड़े एक चर्चित प्रकरण में न्यायालय ने पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया। विशेष बात यह रही कि अभियुक्त निजी वकील रखने में सक्षम नहीं था, इसलिए उसे प्राधिकरण की ओर से निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई गई। जानकारी के अनुसार मामला थाना गींगला क्षेत्र से जुड़ा था, जहां गत वर्ष दर्ज हुए एक प्रकरण की जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया था। मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायालय (पॉक्सो प्रकरण) सलूम्बर में चली। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए कई गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष पेश किया, वहीं बचाव पक्ष ने भी अपने तर्कों के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए। बचाव पक्ष की ओर से लीगल एड डिफेंस काउंसिल के अधिवक्ता महेश कुमार जोशी ने मामले की पैरवी करते हुए अभियोजन साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया तथा न्यायालय के समक्ष विभिन्न कानूनी बिंदुओं को प्रभावी ढंग से रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद न्यायालय ने अपना निर्णय सुनाते हुए अभियुक्त को आरोपों से मुक्त कर दिया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव विनीत कुमार ने बताया कि प्राधिकरण का उद्देश्य आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों को न्याय तक समान पहुंच उपलब्ध कराना है। इसी क्रम में महिलाओं, बच्चों, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग, दिव्यांगजनों, आपदा पीड़ितों, न्यायिक अभिरक्षा में बंद व्यक्तियों तथा निर्धारित आय वर्ग के पात्र लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान की जाती है।