सलुम्बर डिप्टी के हस्तक्षेप से जगी उम्मीद, बोले— सुनवाई नहीं हुई तो स्वयं सुनूंगा दोनों पक्षों को 25 दिन से न्याय की गुहार लगा रहे परिवार, सामाजिक बहिष्कार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग

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सलूंबर। झल्लारा क्षेत्र में कथित सामाजिक बहिष्कार और प्रताड़ना को लेकर पिछले कई दिनों से न्याय की मांग कर रहे परिवारों को अब प्रशासनिक स्तर पर उम्मीद की नई किरण दिखाई दी है। करीब 25 दिनों से विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगा रहे पीड़ित परिवारों का कहना है  अब तक हमारी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन हाल ही में उपखंड प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद उन्हें निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद बंधी है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि  उन्होंने झल्लारा थाने में पांच बार लिखित शिकायतें प्रस्तुत कीं, जबकि जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को भी ज्ञापन सौंपकर न्याय की मांग की।
उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अब तक दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर वास्तविक स्थिति जानने का प्रयास नहीं किया गया। परिवारों का कहना है कि उनका पूरे समाज से कोई विवाद नहीं है, बल्कि कुछ चुनिंदा व्यक्तियों द्वारा उन्हें सामाजिक कार्यक्रमों, धार्मिक आयोजनों और पारिवारिक समारोहों से दूर रखने का प्रयास किया जा रहा है। इससे उन्हें मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मामले में नया मोड़ तबआया जब सलूंबर के डिप्टी हेरम्ब जोशी ने झल्लारा थाना के एसएचओ को दोनों पक्षों को एक साथ बैठाकर निष्पक्ष सुनवाई करने के निर्देश दिए।

पीड़ित परिवारों का कहना है कि

डिप्टी हेरम्ब जोशी ने उन्हें यह आश्वासन भी दिया है कि यदि थाना स्तर पर संतोषजनक सुनवाई नहीं होती है तो वे स्वयं दोनों पक्षों को बुलाकर उनकी बात सुनेंगे

और मामले की वस्तुस्थिति जानेंगे।पीड़ितों ने कहा कि यदि शुरुआत में ही दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर चर्चा करवाई जाती तो विवाद की वास्तविकता बहुत पहले सामने आ जाती। उनका मानना है कि खुली और निष्पक्ष सुनवाई से सभी तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। परिवारों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पुलिस, राजस्व और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए। उनका कहना है कि ऐसी जांच और खुली सुनवाई से यह स्पष्ट हो जाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और किस पक्ष की बात तथ्यात्मक रूप से सही है। लगातार मिल रहे आश्वासनों से निराश परिवारों ने कहा कि पिछले कई सप्ताह से वे न्याय की उम्मीद में कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। ऐसे में अब उनकी निगाहें प्रशासन द्वारा प्रस्तावित सुनवाई और जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। पीड़ित परिवारों ने उम्मीद जताई कि डिप्टी हेरम्ब जोशी के हस्तक्षेप और आश्वासन के बाद मामले का निष्पक्ष समाधान निकल सकेगा तथा उन्हें न्याय और सामाजिक सम्मान मिल पाएगा।

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