सत्य ही नारायण है:आचार्य श्री सुनील सागरजी महाराज द्वारा डॉ प्रदीप कुमावत द्वारा लिखित ‘सत्यनारायण कथा’ की लघु पुस्तिका का हुआ लोकार्पण

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उदयपुर। शहर के सेक्टर 11 स्थित दिगंबर जैन भवन, उदयपुर में भावपूर्ण एवं गरिमामयी आयोजन के तहत आचार्य श्री 108 सुनील सागरजी महाराज के कर कमलों द्वारा डॉ प्रदीप कुमावत द्वारा लिखित ‘सत्यनारायण कथा’ की लघु पुस्तिका मेवाड़ी भाषा में का विधिवत लोकार्पण संपन्न हुआ। इस अवसर पर अखिल भारतीय नववर्ष समारोह समिति के राष्ट्रीय सचिव, डॉ. प्रदीप कुमावत जो इस पुस्तक के लेखक, चिंतक एवं शिक्षाविद हैं, ने गुरुदेव को यह कृति समर्पित की। डॉ. कुमावत द्वारा मेवाड़ी भाषा में रचित यह लघु पुस्तिका अब पाँच पुस्तकों के एक सुंदर उपहार-पैक के रूप में जनसामान्य तक पहुँचाने की दिशा में एक अभिनव प्रयास है। सत्य की सरल व्याख्या और सनातन परंपरा की जीवंत प्रस्तुति इस पुस्तक का वैशिष्ट्य है।
आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ने इस अवसर पर अपने आशीर्वचनों में कहा कि “जीवन में जिसका आचरण सत्य से युक्त होता है, वही नारायण की सच्ची प्राप्ति कर सकता है। नर से नारायण की यात्रा सत्य के पथ पर चलकर ही संभव है।” उन्होंने डॉ. कुमावत द्वारा सनातन धर्म, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे सतत प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की। इस पावन अवसर पर डॉ. कुमावत ने गुरुदेव के चरणों में एक विशेष कविता समर्पित की, जिसमें उन्होंने आचार्य श्री के तप, ज्ञान और समाज कल्याण के भावों को स्वर दिया। साथ ही उन्होंने ‘भव्य रामायण’ एवं ‘समग्र युग’ जैसी मूल्यवान पुस्तकें भी गुरुदेव को भेंट कीं।
कार्यक्रम में श्री शांतिलाल बेलावत सहित अनेक धर्मप्रेमी जन उपस्थित रहे। अंत में डॉ. कुमावत ने आचार्य श्री को श्रीफल भेंटकर भावपूर्ण आत्मिक निवेदन किया। गुरुदेव ने भी उनके नवाचारों, साहित्यिक रचनाओं और सामाजिक सेवाओं की प्रशंसा करते हुए शुभाशीर्वाद प्रदान किया। यह आयोजन न केवल साहित्य एवं आध्यात्मिकता का संगम था, बल्कि सत्य और धर्म के प्रति समाज में जागरूकता लाने की दिशा में एक प्रेरक पहल भी सिद्ध हुआ

रिपोर्टर नारायण सेन

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