भैरव जी की मूर्ति से अश्रुधारा बहने की रहस्यमयी घटना, श्रद्धालुओं में उमड़ा उत्साह

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

सलूम्बर जिले में दिनांक 08/06/2025 झल्लारा (भबराना), राजस्थान के नवनिर्मित सलूंबर जिले के झल्लारा तहसील अंतर्गत लिंबोदा ग्राम पंचायत स्थित हांकलेश्वर महादेव मंदिर, लिंबोदा परिसर में एक अद्भुत और रहस्यमयी घटना ने सभी का ध्यान खींचा है। मंदिर परिसर में स्थापित भैरव जी की मूर्ति की दाहिनी आंख से अचानक पानी की धारा (अश्रुधारा) बहती देखी गई, जिसके बाद श्रद्धालुओं में अद्भुत कौतूहल और आस्था का उफान देखने को मिला। मंदिर पहुंचे केपी सिंह चिखली ने बताया कि वे उनके रिश्तेदार के यहाँ आए थे दोपहर को दर्शन के लिए मंदिर आए जब पुजारी मूर्ति का श्रृंगार करने लगे, तो उन्होंने देखा कि भैरव जी की मूर्ति की दाहिनी आंख से लगातार जल की धारा बह रही थी। यह दृश्य न केवल पुजारी बल्कि वहां मौजूद सभी श्रद्धालुओं के लिए आश्चर्य का कारण बन गया।पुजारी और स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, इस प्रकार की घटना पहले कभी नहीं घटी। मंदिर में वर्षों से पूजा-अर्चना हो रही है, लेकिन आज पहली बार मूर्ति से पानी टपकने की घटना देखने को मिली। इसके बाद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, और भैरव जी के दर्शन के लिए लोगों का तांता लग गया। इस रहस्यमयी घटना को लेकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी कई बातें सामने आ रही हैं: धारा एक ही दिशा में स्थिरता से बहती दिखाई दे रही है, जो किसी नमी स्रोत, संक्षेपण या आंतरिक संरचना से जुड़ा हो सकता है। वीडियो विश्लेषण के अनुसार, धारा पतली, सीधी और लगातार बहती है, जिससे छुपे स्रोत (जैसे पतली ट्यूब या नली) का संदेह होता है। लेकिन यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि मूर्ति के पीछे कोई दीवार, पाइपलाइन या जल स्रोत नहीं दिख रहा। और जहां एक ओर राजस्थान में भीषण गर्मी और सूखा पड़ा हुआ है, वहीं केवल मूर्ति की आंख से जलधारा बहना स्वाभाविक संयोग नहीं लगता। वहीं दूसरी ओर, श्रद्धालु इस घटना को ईश्वर का संकेत, चमत्कार और भक्ति का प्रतीक मान रहे हैं। कई लोग इसे भैरव जी की पीड़ा, चेतावनी या कृपा के रूप में देख रहे हैं। यह घटना जहां एक ओर धार्मिक आस्था का केंद्र बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर विज्ञान और रहस्य के समन्वय का भी उदाहरण बन चुकी है।
विशेषज्ञों और मंदिर प्रशासन से अपेक्षा है कि वे इस घटना की पारदर्शी जांच करवाएं ताकि आमजन को सत्य के करीब लाया जा सके। फिर वह चाहे आस्था से जुड़ा हो या विज्ञान से। ईश्वरीय चमत्कार के आगे हर कोई नत मस्तक है

संवाददाता नाथूलाल सालवी

और पढ़ें

error: Content is protected !!