परसाद (सलूंबर)।ग्राम परसाद में जलदाय विभाग की कथित भ्रष्ट और लापरवाह नीतियों के चलते ग्रामीण पिछले कई वर्षों से गंदा और दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। हालात यह हैं कि स्वच्छ पेयजल की मांग को लेकर ग्रामीणों ने पंचायत स्तर से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक कई बार शिकायतें दर्ज कराई, लेकिन आज तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया।
ग्रामीणों का आरोप है कि विभिन्न जनसुनवाई एवं प्रशासनिक शिविरों में समस्या उठाने पर पहले आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन धरना-प्रदर्शन की स्थिति बनने से पहले ही “कार्य पूर्ण” होने का प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई कार्य नहीं होता। पेयजल संकट से परेशान होकर कई ग्रामीणों ने मजबूरी में कर्ज लेकर निजी बोरिंग करवाई, लेकिन लगातार पानी उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक खर्च वहन करना सभी के लिए संभव नहीं है। कुछ चुनिंदा लोग ही इस बजट को झेल पा रहे हैं, जबकि अधिकांश परिवार आज भी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि विभाग के पास बजट की कोई कमी नहीं है, बावजूद इसके उस बजट का उपयोग जनहित में न होकर अपने स्तर पर किया जाता रहा है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं की गई, तो गांव के जागरूक नागरिक कानून हाथ में लेने जैसी स्थिति में मजबूर हो सकते हैं,
जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द परसाद गांव में शुद्ध पेयजल की स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि हालात बिगड़ने से पहले समस्या का समाधान हो सके।