सलूंबर में बिना पंजीयन चल रहे निजी अस्पतालों पर प्रशासन का शिकंजा दस्तावेज अधूरे मिले तो सीधा पंजीयन निरस्तीकरण, जिलेभर में चलेगा सघन जांच अभियान

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सलूंबर जिले में नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे निजी अस्पतालों पर अब सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है। बिना पूर्ण पंजीयन और आवश्यक दस्तावेजों के अस्पताल संचालन को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. महेन्द्र कुमार परमार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि नियमों की अनदेखी करने वाले निजी अस्पतालों पर नोटिस से लेकर पंजीयन निरस्तीकरण तक की कार्रवाई की जाएगी।
नियमों का उल्लंघन पड़ा तो नहीं मिलेगी राहत
सीएमएचओ डॉ. परमार ने बताया कि निजी अस्पतालों के संचालन के लिए वैध पंजीयन, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल का प्रमाण पत्र, बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट की अनुमति तथा चिकित्सीय मशीनों व उपकरणों का विधिवत पंजीयन अनिवार्य है। इसके बावजूद जिले में कई निजी अस्पताल बिना इन जरूरी दस्तावेजों के संचालित पाए गए हैं, जो सीधे-सीधे स्वास्थ्य नियमों का गंभीर उल्लंघन है।
जिलेभर में चलेगा सघन निरीक्षण अभियान
स्वास्थ्य विभाग द्वारा आगामी दिनों में जिलेभर के निजी अस्पतालों का विशेष निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा। सीएमएचओ ने सभी निजी अस्पताल संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने संस्थानों से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज शीघ्र मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय, सलूंबर में जमा कराएं।
निरीक्षण के दौरान यदि किसी भी अस्पताल में दस्तावेजों की कमी, नियमों की अनदेखी या अनियमितताएं पाई गईं तो संबंधित संस्थान के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
नोटिस, जुर्माना और पंजीयन निरस्तीकरण तक की कार्रवाई संभव
नियमों के उल्लंघन पर अस्पताल संचालकों को नोटिस जारी करने, आर्थिक दंड लगाने, पंजीयन निरस्त करने के साथ-साथ अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। प्रशासन का साफ कहना है कि मरीजों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग का मुख्य उद्देश्य जिले में सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित करना तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। इसी को लेकर सभी निजी अस्पतालों से नियमों का पूर्ण पालन करने और समय पर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने की अपील की गई है।

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