कोटड़ा (उदयपुर)। आदिवासी बहुल कोटड़ा क्षेत्र में ओवरलोड जीपों का संचालन खुलेआम धड़ल्ले से किया जा रहा है। नियमों को ताक पर रखकर 7 सीटर जीपों में 25 से 30 सवारियां ठूंस-ठूंसकर बैठाई जा रही हैं। हालात इतने भयावह हैं कि यात्रियों को जीप के बोनट, छत और पीछे तक लटकाकर सफर कराया जा रहा है।
ड्राइवर सीट के दांए-बांए खिड़कियों पर भी यात्री लटके रहते हैं। कई बार तो यात्रियों की भीड़ के कारण दूर से जीप नजर तक नहीं आती। यह खतरनाक स्थिति लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन परिवहन विभाग और आरटीओ की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
एक दिन पहले कोटड़ा क्षेत्र के डिंगावरी गांव में 27 सवारियों से भरी एक ओवरलोड जीप अनियंत्रित होकर करीब 60 फीट गहरी खाई में गिर गई। गनीमत रही कि बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस दुर्घटना के बाद भी प्रशासन की नींद नहीं खुली है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें इस तरह के जानलेवा सफर को अपनाना पड़ रहा है, क्योंकि क्षेत्र में परिवहन के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। बावजूद इसके नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
अब सवाल यह उठता है कि क्या किसी बड़ी जनहानि के बाद ही परिवहन विभाग और आरटीओ कार्रवाई करेंगे, या समय रहते इन ओवरलोड वाहनों पर लगाम लगाई जाएगी।
प्रशासन/आरटीओ से जवाब का इंतजार
इस मामले में जब परिवहन विभाग और आरटीओ अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद ओवरलोड जीपों पर न तो चालान हो रहे हैं और न ही नियमित जांच की जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि क्षेत्र में पर्याप्त परिवहन साधन उपलब्ध कराए जाएं और नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन चालकों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।








