सेमारी राजकीय विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश में की गई कटौती पर चिंता व्यक्त करते हुए राजस्थान शिक्षक संघ (अम्बेडकर) की ओर से प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण बारूपाल एवं प्रदेश महामंत्री सोहन जोहरम मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजकर निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की गई है।
संघ के जिलाध्यक्ष अनिल मीणा ने बताया कि राज्य के विद्यालयों में वर्षों से ग्रीष्मकालीन अवकाश मध्य मई से 30 जून तक दिया जाता रहा है, लेकिन नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 में इसे घटाकर 16 मई से 20 जून तक कर दिया गया है, जिससे लगभग 10 दिनों की कटौती हो गई है।
उन्होंने बताया कि मई-जून में राजस्थान के अधिकांश क्षेत्रों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों को विद्यालय बुलाना उनके स्वास्थ्य की दृष्टि से उचित नहीं है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि अन्य विभागों में कर्मचारियों को प्रतिवर्ष 30 दिन का उपार्जित अवकाश (PL) मिलता है, जबकि शिक्षा विभाग में केवल 15 PL ही दिए जाते हैं। ऐसे में ग्रीष्मावकाश में कटौती से अवकाश असंतुलन की स्थिति पैदा होती है।
संघ ने कहा कि यदि अवकाश कटौती के एवज में राजस्थान सेवा नियम के तहत अतिरिक्त उपार्जित अवकाश दिया जाता है तो इससे राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। इसलिए व्यावहारिक समाधान के रूप में ग्रीष्मकालीन अवकाश को पूर्व की भांति 30 जून तक यथावत रखा जाना चाहिए।
संघ ने मांग की है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश में की गई कटौती पर पुनर्विचार करते हुए इसे पूर्व की भांति 30 जून तक बहाल किया जाए, अन्यथा कटौती की अवधि के अनुपात में शिक्षकों को अतिरिक्त उपार्जित अवकाश (PL) प्रदान किया जाए।