सलूंबर। शहर के हृदय स्थल माने जाने वाले सेरिग तालाब की स्थिति इन दिनों चिंताजनक होती जा रही है। तालाब में गिर रहे सीवरेज और गंदे नालों के पानी के कारण इसकी जल गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। हाल ही में आई राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि हुई है, जिससे शहरवासियों की चिंता बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार झील संरक्षण प्राधिकरण के सदस्य तेजशंकर पालीवाल ने 28 जनवरी 2026 को इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत के बाद राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने 13 फरवरी 2026 को तालाब के विभिन्न स्थानों से पानी के नमूने लिए। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि नाले से गिर रहे गंदे पानी के कारण तालाब के पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
रिपोर्ट के आधार पर राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सलूंबर नगरपरिषद को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है। बोर्ड ने चेतावनी दी है कि तालाब में गिर रहा सीवरेज का गंदा पानी न केवल मानव स्वास्थ्य बल्कि तालाब में रहने वाले जीव-जंतुओं के लिए भी खतरा बनता जा रहा है। बोर्ड ने नालों और अन्य स्रोतों से आने वाले गंदे पानी को रोकने के लिए तुरंत आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी है।
हर शनिवार सफाई अभियान, लेकिन स्थायी समाधान नहीं
इधर शहर के पर्यावरण प्रेमियों और जागरूक नागरिकों द्वारा पिछले कई सप्ताह से हर शनिवार को तालाब के किनारे सफाई अभियान चलाया जा रहा है। जहां से सीवरेज लाइन गुजरती है, वहां नाले में जमा कचरे को हटाकर जाम खोला जा रहा है। हालांकि यह प्रयास अस्थायी राहत जरूर दे रहे हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है।
प्रमुख घाटों की रौनक भी हुई कम
गंदे नाले के कारण तालाब के प्रमुख घाट — विलो का दरवाजा, बारी घाट, पंचमुखी घाट और महिला घाट — की रौनक भी कम हो गई है। पहले इन घाटों पर बड़ी संख्या में लोग नहाने-धोने और आवाजाही के लिए आते थे, लेकिन अब गंदगी और दुर्गंध के कारण लोगों की संख्या घटती जा रही है।
झील संरक्षण प्राधिकरण के सदस्य तेजशंकर पालीवाल ने बताया कि इस संबंध में कलेक्टर और संबंधित विभागों को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की गई थी। इसके बाद अधिकारियों के नेतृत्व में पानी के नमूने लिए गए, जिनकी रिपोर्ट में पानी की गुणवत्ता में गिरावट सामने आई है।
पर्यावरण से जुड़े भंवरलाल बुनकर (पूर्व विकास अधिकारी, एलआईसी उदयपुर) का कहना है कि गंदे सीवरेज का पानी तालाब में गिरने से जलजीवों के साथ-साथ मानव जीवन भी प्रभावित हो रहा है। नगरपरिषद को घाटों की नियमित सफाई कराने के साथ सीवरेज के पानी को तालाब में गिरने से रोकना चाहिए।
वहीं स्थानीय निवासी और पर्यावरण प्रेमी प्रहलाद पटेल ने कहा कि सेरिग तालाब सलूंबर का प्रमुख और ऐतिहासिक स्थल है, लेकिन इसकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। गर्मियों में घाटों के पास दुर्गंध इतनी बढ़ जाती है कि वहां खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है।
नागरिकों की मांग
पर्यावरण क्षेत्र से जुड़े लोगों और आसपास रहने वाले नागरिकों का कहना है कि यदि सीवरेज के नाले को तालाब से बाहर निकाला जाए तो सेरिग तालाब की पुरानी रौनक फिर से लौट सकती है।